निर्भया केस: फांसी पर रोक के खिलाफ नाराज महिलाओं ने शुरू किया अनशन

हाईकोर्ट में रविवार के दिन भी इस मामले पर विशेष सुनवाई हुई। केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि न्याय की खातिर दोषियों की फांसी में जरा भी देर नहीं होनी चाहिए।

Published by SK Gautam Published: February 2, 2020 | 4:26 pm
Modified: February 2, 2020 | 8:13 pm

नई दिल्ली:  निर्भया केस के दोषियों की फांसी की तारीख लगातार कई महीनों से टल रही है। आज रविवार को केंद्र सरकार ने पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट में रविवार के दिन भी इस मामले पर विशेष सुनवाई हुई। केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि न्याय की खातिर दोषियों की फांसी में जरा भी देर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों की ओर से फांसी को जानबूझकर टालने की कोशिशें की जा रही हैं और इसका अमानवीय असर होगा।

फांसी पर रोक के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

निर्भया के दोषियों की फांसी पर रोक के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि अभी तक दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला नहीं सुनाया है। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता योगिता दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नंबर 7 पर धरने पर बैठ गई हैं। उन्होंने कहा कि जब तक निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने की तारीख नहीं दी जाती है, तब तक वो यहां से नहीं उठेंगी।

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जिनके कानूनी विकल्प खत्म, उन्हें दी जाए फांसी

तुषार मेहता ने कहा कि जिन दोषियों के तमाम कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं, उन्हें फांसी दी जा सकती है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि चारों को फांसी एक साथ दिया जाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा कि अगर मामले में चार दोषी हैं, तो दो के कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं, लेकिन दो के कानूनी विकल्प बचे हुए हैं। ऐसी स्थिति में क्या होगा?

इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि उनको फांसी दी जा सकती है। तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जब तक एक अपराध के सभी दोषियों की अपील पर फैसला नहीं हो जाता हैं, तब तक फांसी नहीं हो सकती है। हालांकि दोषियों की अपील खारिज होने के बाद अलग-अलग फांसी हो सकती है। एक साथ फांसी देने की कोई अनिवार्यता नहीं है।

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दोषी कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठा रहे हैं

बीते दिन शनिवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में चारों दोषियों के साथ ही तिहाड़ जेल प्रशासन और डीजी जेल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था- दोषी कानूनी प्रकिया का फायदा उठा रहे हैं। वे एक-एक कर कानूनी बचाव के रास्ते अपना रहे हैं, ताकि इस जघन्य अपराध की सजा से बच सकें।

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केंद्र ने भी कहा दोषियों ने लगातार कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग किया

जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोषियों ने फांसी टालने को लेकर शुक्रवार को ट्रायल कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इसमें कोई भी वजह ऐसी नहीं थी, जिसकी न्यायिक जांच की जा सके। यह केस इतिहास में ऐसे जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा, जिसमें दोषियों ने लगातार कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद भी दोषी फांसी टालने के लिए बार-बार कोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं। अगर ऐसे ही प्रक्रिया का पालन होता रहा तो केस कभी खत्म ही नहीं होगा।

तिहाड़ जेल ने कहा था- फांसी पर लटकाया जाए या नहीं

दरअसल, शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगाई थी। अदालत इस मामले पर सुनवाई कर रही थी कि गुनहगारों को डेथ वॉरंट के हिसाब से 1 फरवरी (शनिवार) को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाए या नहीं। इस दौरान दोषियों में शामिल अक्षय, पवन और विनय की याचिका पर तिहाड़ प्रशासन ने कहा था कि दोषियों को अलग-अलग फांसी दे सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि इस देश की अदालतें कानूनी उपायों में जुटे किसी भी दोषी से आंख मूंदकर भेदभाव नहीं कर सकतीं।

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सरकार बार-बार दोषियों के सामने झुक रही है- निर्भया की मां आशा देवी

दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा था- एक दोषी की याचिका लंबित होने से बाकी दोषियों को फांसी देना गैर-कानूनी होगा। अभी दोषियों के पास दया याचिका समेत कानूनी विकल्प हैं। वहीं, निर्भया की मां आशा देवी ने कहा था- 7 साल पहले उनकी बेटी के साथ अपराध हुआ और सरकार बार-बार दोषियों के सामने झुक रही है।

दोषी अक्षय ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी, मुकेश-विनय की खारिज हुईं

शनिवार को दोषी अक्षय ठाकुर ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दया याचिका भेज दी। इसी दिन दोषी विनय शर्मा की दया याचिका भी खारिज हो गई। राष्ट्रपति दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका 17 जनवरी को ठुकरा चुके हैं। इस फैसले की न्यायिक समीक्षा को लेकर लगाई याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज हुई। अब मुकेश के पास फांसी से बचने का कोई रास्ता नहीं है। सिर्फ दोषी पवन गुप्ता के पास क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका के विकल्प हैं। शुक्रवार को उसने गैंगरेप के वक्त नाबालिग होने का दावा खारिज होने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पवन की रिव्यू पिटीशन ठुकराई।

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चारों दोषियों की वर्तमान स्थिति

मुकेश सिंह और विनय शर्मा के दोनों विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो चुके हैं।
अक्षय ठाकुर की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो चुकी है। उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास विचाराधीन।
पवन गुप्ता ने न तो क्यूरेटिव पिटीशन दायर की है और न ही राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है।