चंद्रयान-2: जानें कैसे, मिशन अभी समाप्त नहीं हुआ

‘मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत -लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर- नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत -चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।’

Published by Harsh Pandey Published: September 7, 2019 | 8:30 am
Modified: September 7, 2019 | 9:58 am

नई दिल्ली: चंद्रयान-2, वैज्ञानिकों की 11 वर्ष 48 दिन की मेहनत बेकार नहीं जायेगी। बता दें कि भारत के मून लैंडर विक्रम के भविष्य और उसकी स्थिति क्या होगी, इसके संबंध में अभी कोई जानकारी नहीं है। कि चंद्रयान-2 दुर्घटनाग्रस्त हो गया या उसका संपर्क टूट गया, लेकिन 978 करोड़ रुपये लागत वाला चंद्रयान-2 मिशन का सबकुछ खत्म नहीं हुआ है।

दरअसल, लैंडर विक्रम को देर रात लगभग 1 बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद की सतह पर पहुंचने से करीब 2.1 किलोमीटर पहले ही उसका इसरो से संपर्क टूट गया।

इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत -लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर- नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत -चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।

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साथ ही अधिकारी ने बताया कि एक साल मिशन अवधि वाला ऑर्बिटर चंद्रमा की कई तस्वीरें लेकर इसरो को भेज सकता है। जिससे उसकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है।

बताते चलें कि चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान में तीन खंड हैं -ऑर्बिटर (2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड), विक्रम (1,471 किलोग्राम, चार पेलोट) और प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पेलोड)। विक्रम दो सितंबर को आर्बिटर से अलग हो गया था। चंद्रयान-2 को इसके पहले 22 जुलाई को भारत के हेवी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल-मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) के जरिए अंतरिक्ष में लांच किया गया था।

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यहां भटक गया चांद…

इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क केंद्र के स्क्रीन पर देखा गया कि विक्रम अपने निर्धारित पथ से थोड़ा हट गया और उसके बाद संपर्क टूट गया। लैंडर बड़े ही आराम से नीचे उतर रहा था, इसके साथ ही इसरो के अधिकारी के चेहरे पर खुशी थी। लैंडर ने सफलतापूर्वक अपना रफ ब्रेकिंग चरण को पूरा किया और यह अच्छी गति से सतह की ओर बढ़ रहा था।

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चंद्रयान-2 बड़ा प्रश्न छोड़ गया कि आखिर अंतिम क्षण में ऐसा क्या हो गया? इसरो के एक वैज्ञानिक के मुताबिक लैंडर का नियंत्रण उस समय समाप्त हो गया होगा, जब नीचे उतरते समय उसके थ्रस्टर्स को बंद किया गया होगा और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया होगा, जिसके कारण संपर्क टूट गया।