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स्कूल में बच्ची से बार बार दुष्कर्म, हैवान को 20 साल की सजा

यह घटना हैदराबाद की है। जहां एक अदालत ने गुरुवार, 7 जनवरी को एक स्कूल के चौकीदार को कई मौकों पर एक छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के मामले में 20 साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अक्टूबर 2017 के मामले में अपना फैसला दिया है।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 9 Jan 2021 7:08 AM GMT

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रामकृष्ण वाजपेयी

हैदराबाद: स्कूलों को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है लेकिन यदि वहां पर ही हमारे भविष्य की बुनियाद साजिश की शिकार हो जाए, उसका भविष्य असुरक्षित हो जाए तो इससे भयानक कुछ नहीं हो सकता। सरकारों को बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए मानसिक विकृतियों के शिकार लोगों को चिह्नित करने की जरूरत है। केवल सजा या कठोर दंड से इसका निदान नहीं हो सकता है।

अक्टूबर 2017 की है घटना

यह घटना हैदराबाद की है। जहां एक अदालत ने गुरुवार, 7 जनवरी को एक स्कूल के चौकीदार को कई मौकों पर एक छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के मामले में 20 साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अक्टूबर 2017 के मामले में अपना फैसला दिया है। बच्ची की मां ने चौकीदार कमल भान पर आरोप लगाया था कि वह उसकी बेटी का स्कूल के बेसमेंट की पार्किंग में इंटरवल, दोपहर के भोजन के घंटों और स्कूल के घंटों के बाद यौन उत्पीड़न करता था।

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आरोपी ने लड़की को धमकाया, कहा किसी को न बताये

आरोपी ने लड़की को किसी को भी इसका खुलासा न करने की धमकी दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्ची ने मुख्य परीक्षा के दौरान घटना को बताया और आरोपी की पहचान की, जिससे उसके खिलाफ अपराध स्थापित हो गए।

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लड़की मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरी

30 वर्षीय चौकीदार को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 और धारा 376 (2) (i) की धारा 6 (एल) (एम) (ओ) के तहत दंडनीय पाया गया है। भारतीय दंड संहिता की 506 POCSO के लिए एक विशेष न्यायाधीश ने कहा कि लड़की यौन उत्पीड़न की लगातार घटनाओं के कारण गंभीर मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरी।

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न्यायाधीश ने परिवार को मुआवजा देने का दिया आदेश

न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को लड़की और उसके परिवार को मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया। अदालत ने अभियुक्त को 20 साल के सश्रम कारावास और 1000 के जुर्माने के साथ तीन महीने के साधारण कारावास का आदेश दिया, यदि जुर्माना राशि बकाया है। अदालत ने आरोपी को एक साल के सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई और धारा 506 आईपीसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए 1,000 का जुर्माना लगाया।

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