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चीनी सैनिकों का झूठ: अरुणाचल को बताया अपना, सच्चाई बेनकाब

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रोज नई चाल चलने वाले चीन ने अब एक नई शरारत की है। भारत की ओर से पांच लापता भारतीय युवकों का मुद्दा उठाए जाने पर चीन ने एक और हिमाकत करते हुए अरुणाचल प्रदेश को ही अपना हिस्सा बता डाला।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 8 Sep 2020 5:38 AM GMT

चीनी सैनिकों का झूठ: अरुणाचल को बताया अपना, सच्चाई बेनकाब
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चीनी सैनिकों का झूठ: अरुणाचल को बताया अपना, सच्चाई बेनकाब (social media)
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नई दिल्ली: लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रोज नई चाल चलने वाले चीन ने अब एक नई शरारत की है। भारत की ओर से पांच लापता भारतीय युवकों का मुद्दा उठाए जाने पर चीन ने एक और हिमाकत करते हुए अरुणाचल प्रदेश को ही अपना हिस्सा बता डाला। चीन ने लापता युवकों के बारे में कोई जानकारी न देते हुए कहा कि चीन ने कभी भी तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को कोई मान्यता ही नहीं दी। चीन ने यह भी कहा कि वह इलाका तो चीन का दक्षिणी तिब्बत क्षेत्र है।

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भारत ने उठाया था लापता युवकों का मुद्दा

एलएसी पर भारत के साथ कई महीनों से सैन्य विवाद में उलझे चीन की रोज नई शरारत सामने आ रही है। अरुणाचल प्रदेश के पांच युवकों के लापता होने का मुद्दा भारतीय सेना ने चीन की सेना के सामने उठाया था। भारतीय सेना की ओर से इन युवकों के चीन की हिरासत में होने के संबंध में सवाल पूछा गया था।

चीन के प्रवक्ता का विवादित बयान

अब इस बाबत चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बेसिर पैर वाला विवादित बयान दिया है। उन्होंने लापता युवकों के बारे में तो कोई जानकारी नहीं दी मगर यह जरूर कह दिया है कि चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश को कोई मान्यता ही नहीं दी गई। उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ते हुए अरुणाचल प्रदेश को चीन के दक्षिणी तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा बता दिया।

china china (social media)

युवकों के बारे में नहीं दी जानकारी

चीन के प्रवक्ता ने अरुणाचल प्रदेश के पांच युवकों के अपहरण की जानकारी से साफ तौर पर इनकार कर दिया। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास भारतीय सेना की ओर से संदेश भेजे जाने की कोई जानकारी नहीं है। अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस विधायक ने इन युवकों को चीन की सेना के द्वारा अपहृत किए जाने का सनसनीखेज खुलासा किया था।

पुलिस ने शुरू की जांच पड़ताल

इलाके के ग्रामीणों का दावा है कि ये युवक भारतीय सेना के पोर्टर के रूप में काम करते थे। ये दुर्गम इलाकों में सामान की ढुलाई के काम में लगे हुए थे। भारत की ओर से इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है और एक पुलिस टीम भारत चीन सीमा रेखा मैकमोहन लाइन से सटे सीमावर्ती इलाकों में भेजी गई है।

भारतीय सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल हर्षवर्धन पांडे का कहना है कि जंगली इलाकों या पहाड़ों में कोई ऐसी मानक रेखा नहीं है जिसे ध्यान में रखकर लोग इधर-उधर जा सकें। उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है कि पांचों भारतीय उधर चले गए हों और यह कोई असामान्य बात नहीं है।

भारत की मजबूती से चीन बौखलाया

इस बीच पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पैंगोंग झील के इर्द-गिर्द महत्वपूर्ण सामरिक चोटियों पर भारतीय सेना की मजबूत पकड़ के बाद चीन बौखला गया है। जानकारों के अनुसार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी चीनी सेना से इस मुद्दे को लेकर नाराजगी जाहिर की है।

चीनी सेना ने आरोप भारत पर मढ़ा

सोमवार देर रात चीनी सेना की ओर से फायरिंग किए जाने की भी खबर है। हालांकि चीन की ओर से इसके लिए भारतीय सेना पर तो शुभ माना गया है। चीनी सेना के प्रवक्ता कर्नल झांग शुइली ने आरोप लगाया है कि भारतीय सैनिक पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर उनकी सीमा में घुस आए। भारतीय सेना की ओर से फायरिंग की गई। इसके जवाब में चीनी सेना की ओर से फायरिंग की गई। चीनी सेना के प्रवक्ता ने भारतीय सेना पर दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

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भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

अभी भारत की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वैसे सूत्रों का कहना है कि घुसपैठ की कोशिश चीनी सैनिकों ने की थी। भारतीय सैनिकों की ओर से चेतावनी दिए जाने पर चीन की ओर से फायरिंग की गई। इस पर भारतीय सैनिकों ने भी फायरिंग करके जवाब दिया। एलएसी पर लगभग चार दशक बाद पहली बार गोली चली है। गलवान में हुई हिंसक झड़प के दौरान भी दोनों पक्षों के बीच गोली नहीं चली थी।

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