सेना हुई ताकतवर: चीन की हालत खराब, माइनस तापमान में रूसी टेंट बनेगा सहारा

भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच अगले सप्ताह या अगले कुछ दिनों में लद्दाख के इस तनाव वाले क्षेत्र में बर्फबारी होने की आशंका है। इससे ठंड बेहद बढ़ जाएगी और तापमान और अधिक गिरेगा। इस तापमान में टैंक और बड़े हथियार बेकार हो जाएंगे।

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सेना हुई ताकतवर: चीन की हालत खराब, माइनस तापमान में रूसी टेंट बनेगा सहारा-(courtesy-social media)

नई दिल्लीा: भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की हुई वार्ता में कोई प्रगति नहीं हुई है। ऐसे संकेत साफ नजर आ रहे हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC से चीनी सैनिकों की वापसी होने में अभी देर लगेगी। इसका मतलब यह होगा कि भारत और चीन के सैनिकों को लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहना होगा।

लद्दाख में भारी बर्फबारी होने की आशंका

वहीं दूसरी तरफ भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच अगले सप्ताह या अगले कुछ दिनों में लद्दाख के इस तनाव वाले क्षेत्र में बर्फबारी होने की आशंका है। इससे ठंड बेहद बढ़ जाएगी और तापमान और अधिक गिरेगा। इस तापमान में टैंक और बड़े हथियार बेकार हो जाएंगे। इस दौरान सैनिकों की सहनशीलता का परीक्षण होगा। ऐसे में भारतीय सैनिकों का साथ ‘शक्क।रपारा’ देगा।

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सर्दियों से बचने के लिए भारतीय सेना रूसी टेंट खरीद रही

एलएसी के ऊंचे इलाकों में सर्दियों की परिस्थितियों से निपटने के लिए भारतीय सेना रूसी टेंट खरीद रही है। सूत्रों के अनुसार कानपुर में आर्डिनेंस फैक्टिरी से इन टेंट की खरीद के लिए संपर्क किया गया है। चीन ने पैंगोंग झील और एलएसी के अन्य तनाव वाले स्थानों पर अस्थाीई निर्माण किए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि लॉकडाउन के कारण सेना के लिए कपड़े वाले टेंट या ऐसी अन्यं रहने योग्यन चीजों का निर्माण करने वाले उत्पाबदक उपलब्धक नहीं थे। ऐसे में रूसी टेंट सबसे तेज और सबसे प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आया है। यह टेंट सइबेरिया में पड़ने वाली ठंड का सामना भी कर सकता है।

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देसी जुगाड़ भी अपना रहे हैं सैनिक

वहीं सैनिक ठंड में खुद को ठीक रखने के लिए देसी जुगाड़ भी अपना रहे हैं। आईटीबीपी के जवान लंबी तैनाती के कारण विषम मौसम और रहन-सहन को बेहतर समझते हैं। उन्होंने सुपर फूड के रूप में ‘शक्करपारा’ पर भरोसा करने का फैसला किया है।

शक्करपारा एक उत्तर भारतीय स्नै क है, जो गेहूं के आटे को डीप फ्राई कर और फिर उसे शक्‍कर की चाशनी में डुबोकर बनाया जाता है। एक जवान ने इस असामान्य विकल्प के बारे में बताया कि इसमें गेहूं होता है और चीनी या शक्कुर आपको ऊर्जा देती है। इसे बनाना और ले जाना बेहद आसान है।

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ऊंचाइयों पर कब्जा किये गए क्षेत्रों में पानी की कमी

दिल्ली स्थित सेना के मुख्यालय ने भी पुष्टि की है कि ‘शक्करपारा’ के बैच तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें अग्रिम पोस्टों पर भेजा जा रहा है। भारतीय सैनिकों ने जिन ऊंचाइयों पर कब्जा कर रखा है, वहां पानी की आपूर्ति दूसरी बड़ी चिंता है। कुछ अग्रिम पोस्टभ में पाइप के जरिये पानी पहुंचाने की व्य वस्थाा की गई है। चुशुल में स्थानीय लोगों ने कुछ अन्य स्थानों पर भारतीय सेना को पानी ले जाने में मदद की है। लेकिन सैनिकों को सर्दियों के महीनों में जल स्रोत के रूप में बर्फ का उपयोग करने के लिए तैयार किया जाता है।

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