चिदंबरम के निशाने पर सेना प्रमुख जनरल रावत, जानिए इसके पीछे की वजह?

सीएए कानून को लेकर जहां देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं विपक्ष भी भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सीएए को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तिरुवनंतपुरम में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और बीजेपी पर निशाना साधा।

Published by suman Published: December 28, 2019 | 9:30 pm
Modified: December 28, 2019 | 9:32 pm

तिरुवनंतपुरम: सीएए कानून को लेकर जहां देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं विपक्ष भी भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सीएए को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तिरुवनंतपुरम में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और बीजेपी पर निशाना साधा।

चिदंबरम ने कहा, अमित शाह को राज्यसभा और लोकसभा में बहस को फिर से सुनना चाहिए, उन्होंने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया और अब वह इस पर बहस के लिए राहुल गांधी को चुनौती दी हैं। इस कानून के बारे में सरकार ने जो कुछ भी बताया जा रहा है, सब कुछ गलत है।

 

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चिदंबरम का सेना प्रमुख पर निशाना
चिदंबरम ने कहा, ‘डीजीपी और आर्मी जनरल को सरकार का समर्थन करने के लिए कहा है, यह शर्म की बात है। हम जनरल रावत से अपील करते हैं, सेना के प्रमुख हैं, अपने पद की गरिमा का ध्यान रखें। यह सेना का काम नहीं है कि हम राजनेताओं को बताएं कि हमें क्या करना चाहिए, क्योंकि यह हमारा काम नहीं है कि हम आपको बताएं कि युद्ध कैसे लड़ा जाए।’

 सेना प्रमुख  ने क्या कहा था…
बता दें कि सेना प्रमुख बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा था कि नेता जनता के बीच से उभरते हैं, अगर कोई नेता आगजनी और हिंसा भड़काने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेज के छात्रों व जनता को उकसाता है तो वह नेतृत्व नहीं कर सकता। नेता वही है जो जनता को सही दिशा में लेकर जाए।

जनरल बिपिन रावत ने कैंपस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर नाराजगी जाहिर की थी। इस पर विवाद शुरु हो गया।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम के हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सेनाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था।

 

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सेनाध्यक्ष पर पलटवार करते हुए उनसे सवाल पूछा था। ‘नेता वे नहीं है जो लोगों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। सेनाध्यक्ष ने नागरिकता प्रदर्शन को लेकर यह कहा। सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोनाध्यक्ष को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था, ‘अपने कार्यालय के प्रभाव क्षेत्र को भी समझ लेना नेतृत्व है। यह (नेतृत्व) नागरिक की सर्वोच्चता को समझने के बारे में और जिस संस्था के प्रमुख आप हैं उसकी गरिमा को ठीक तरह से जानना भी  है।