जानिए कहां लगेगी जेटली की मूर्ति? राज्य उत्सव के तौर पर मनाया जाएगा जन्मदिन

बिहार के मुख्यमंत्री ने जेटली के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया था। उन्होंने राज्य में दो दिनों के राजकीय शोक की भी घोषणा की थी। कुमार ने बताया था कि जेटली से उनके व्यक्तिगत संबंध थे।

Published by Aditya Mishra Published: August 31, 2019 | 4:21 pm
Modified: August 31, 2019 | 4:23 pm

पटना : राजधानी के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शनिवार को एनडीए की ओर से आयोजित विशेष श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे में बीजेपी के दिग्गज नेता व पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली की याद में मूर्ति स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने कहा कि जेटली की जयंती को हर साल राजकीय समारोह के रूप में मनाया जायेगा।

सीएम ने कहा कि बिहार में हम लोगों को सेवा करने का जो मौका मिला है उसमें अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका है। बता दें कि 24 अगस्त को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का एम्स में 66 साल की उम्र में निधन हो गया था।

बिहार के मुख्यमंत्री ने जेटली के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया था। उन्होंने राज्य में दो दिनों के राजकीय शोक की भी घोषणा की थी। कुमार ने बताया था कि जेटली से उनके व्यक्तिगत संबंध थे।

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फिरोजशाह कोटला का नाम बदलकर जेटली के नाम पर रखा गया

दिवंगत अरुण जेटली को श्रद्धांजलि देते हुए दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने 28 अगस्त को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर उसे अरुण जेटली स्टेडियम के नाम पर रखने का फैसला लिया है। इसका नामकरण 12 सितंबर को एक समारोह में किया जाएगा।

मालूम हो कि बीते 24 अगस्त को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया था।

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वित्त मंत्री रहते अरुण जेटली ने लिए थे ये बड़े फैसले

देश में जीएसटी के रूप में ‘एक देश, एक कर’ देने में जेटली ने अहम भूमिका महत्‍वपूर्ण थी। अरुण जेटली ने वित्त मंत्री के तौर पर GST को लागू किया। पूरे देश में 1 जुलाई 2017 को आधी रात से जीएसटी लागू हो गया था।

इस दिन से देश भर में चल रहे 17 टैक्स और 26 सेस खत्म हो गए थे। जीएसटी काउंसिल ने देश भर में पांच स्लैब लगाए थे, जिनके हिसाब से ही लोगों को टैक्स देना शुरू किया था।

केवल पेट्रोल-डीजल, तंबाकू उत्पाद, शराब, रसोई गैस सिलेंडर जैसी वस्तुओं को छोड़कर के बाकी सभी को इसके दायरे में लाया गया था।

वहीं वस्तुओं के एक राज्य से दूसरे राज्य में लाने-जाने के लिए ई-वे बिल एक अप्रैल 2018 से लागू किया गया था। इससे कारोबारियों को सामान ले जाने पर राज्यों के नाके पर चेकिंग कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

जेटली की अध्यक्षता में ही एसबीआई में सहयोगी बैंकों व भारतीय महिला बैंक का विलय हुआ था। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक का विलय किया गया था।

बकाएदारों से वसूली के लिए उठाये ठोस कदम

कर्ज न चुकाने वाले बकाएदारों से निर्धारित समय के अंदर बकाए की वसूली के लिए अरुण जेटली इनसॉल्वेंसी एवं बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) लेकर आए।

सर्वप्रथम यह बिल 21 दिसंबर 2015 को प्रकाशित हुआ था। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद 28 मई 2016 को यह बिल लागू हुआ था।

इस बिल के लागू होने के बाद बैंकों और अन्य लेनदारों को दिवालिया कंपनियों से वसूली में मदद मिल रही है। 28 फरवरी 2019 तक इस बिल के तहत दिवालिया कंपनियों से 1.42 लाख करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है।

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने चलन में मौजूद 500 और एक हजार रुपये के नोट को बंद कर दिया था। सरकार के इस अभूतपूर्व कदम की जानकारी पीएम के अलावा केवल जेटली और कुछ चुनिंदा लोगों को ही थी।

नोटबंदी में निभाई अहम भूमिका

नोटबंदी करने का फैसला लेने में जेटली की अहम भूमिका रही थी। जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।

जेटली ने वित्त मंत्री रहते हुए रेल बजट को आम बजट में शामिल कर दिया। उससे पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किया जाता था।

उन्होंने बजट पेश करने की तारीख में बदलाव किया। पहले यह फरवरी महीने की आखिरी तारीख में पेश किया जाता था। लेकिन, अरुण जेटली ने इसे एक महीना पहले 1 फरवरी कर दी।

एफडीआई के नियमों को किया आसान

निवेशकों को लुभाने के लिए और निवेश की रफ्तार को बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में एफडीआई के नियमों को आसान किया। इससे विदेशी निवेशक बड़ी संख्या में भारत में निवेश करने लगे।

प्रधानमंत्री जनधन अकाउंट योजना की शुरुआत भी जेटली के वित्त मंत्री रहते ही की गई। आज वर्तमान में 40 करोड़ से ज्यादा जनधन अकाउंट हैं। इन अकाउंट में 1 लाख करोड़ से ज्यादा रुपये जमा हैं।

देश में गरीबों को फायदा पहुंचाने के लिए कई योजनाओं के तहत सब्सिडी दी जा रही थी। इसमें भ्रष्टाचार की बड़ी शिकायतें थीं। तत्कालीन मनमोहन सरकार ने सब्सिडी में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लाभार्थियों को सीधे बैंक खाते में सब्सिडी का पैसा देने की योजना बनाई थी।

इस योजना को लागू भी किया गया, लेकिन इसके मनमाफिक परिणाम नहीं मिले। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद अरुण जेटली के नेतृत्व में इस योजना को कड़ाई से लागू किया गया। आज सभी योजना की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।

एनपीए बोझ को कम करने के लिए उठाये कई महत्वपूर्ण कदम

बैंक पर एनपीए बोझ को कम करने की दिशा में उनके शासनकाल में कई बड़े फैसले लिए गए। साथ ही घाटे से जूझ रहे बैंकों में कंसोलिडेशन का सिलसिला भी उसी समय शुरू हुआ।

देश भर में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ाने का श्रेय भी जेटली को जाता है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट, पीओएस मशीन, यूपीआई भीम ऐप जैसी सेवाओं को पूरे देश में शुरू करवाया गया था। इसके चलते नगद ट्रांजेक्शन में काफी कमी देखने को मिली और अब लोग इनका अधिक संख्या में प्रयोग करने लगे हैं।

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