मोदी सरकार के बहीखाते पर जानिए नेताओं की राय, चिदंबरम बोले, क्या काॅमेडी है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में 2019-20 के लिए बजट पेश किया। सत्ता पक्ष ने बजट की जमकर तारीफ की है और इसे न्यू इंडिया का बजट बताया है। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने इसे पुराने वादों का दोहराव और ‘नई बोतल में पुरानी शराब’ करार दिया है।

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में 2019-20 के लिए बजट पेश किया। सत्ता पक्ष ने बजट की जमकर तारीफ की है और इसे न्यू इंडिया का बजट बताया है। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने इसे पुराने वादों का दोहराव और ‘नई बोतल में पुरानी शराब’ करार दिया है।

न्यू इंडिया के सपनों को बजट: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को भारत को पावरहाउस बनाने वाला और 21वीं सदी के सपनों को पूरा करने वाला बजट बताया। उन्होंने ने कहा, ‘आज लोगों के जीवन में नई आशाएं और खूब सारी आकांक्षाएं हैं। यह बजट लोगों को यह विश्वास दे रहा है कि दिशा सही है, गति सही है और इसलिए लक्ष्य पर पहुंचना भी सही है। यह बजट 21वीं सदी के भारत के सपने को पूरा करने वाला है। यह बजट 2022 यानी आजादी के 75वें वर्ष के लिए निर्धारित संकल्पों को पूरा करने के लिए मार्ग बनाएगा।’

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‘नई बोतल में पुरानी शराब’ जैसा बजट: कांग्रेस

तो वहीं मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने बजट की आलोचना की है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘बजट में कुछ भी नया नहीं है। इसमें पुराने वादों का दोहराव है। वे न्यू इंडिया की बात कर रहे हैं लेकिन बजट नई बोतल में पुरानी शराब है।

क्या चल रही है कॉमिडी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण की तीखी आलोचना की है। चिदंबरम ने इसे अबतक के सबसे अस्पष्ट बजट भाषणों में से एक बताया है। इसके अलावा उन्होंने बिना पैन कार्ड के सिर्फ आधार कार्ड से आईटीआर फाइल कर सकने की घोषणा को कॉमिडी करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार कभी कुछ करती है, कभी कुछ जैसे कोई कॉमिडी चल रहा हो।

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चिदंबरम ने कहा कि बजट भाषण में यह तक नहीं बताया गया कि सरकार का कुल खर्च कितना है, कितना राजस्व मिला है। उन्होंने कहा, ‘बड़ी तादाद में लोग बजट स्पीच सुनते हैं, उन्हें बजट डॉक्युमेंट नहीं मिलता। डॉक्युमेंट सांसदों को मिलते हैं, लेकिन आप नहीं बताते कि सरकार का कुल खर्च कितना है, कितना राजस्व अर्जित हुआ…। आप लोगों को अंधेरे में क्यों रख रहे हैं। इन आंकड़ों का संसद में खुलासा नहीं करना अनैतिक है।… मुझे यह तक नहीं पता है कि रक्षा क्षेत्र को कितना आवंटित हुआ है। वैसे, मैं शाम तक या कल सुबह तक यह जान जाऊंगा। लेकिन मैं समझता हूं कि यह भारत के लोगों के साथ अन्याय है कि उन्हें आप न बताए कि डिफेंस को कितना दिया गया है, मनरेगा को कितना दिया गया है।’

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चिदंबरम ने कहा कि जब वित्त मंत्री ने दावा किया कि नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) एक लाख करोड़ रुपये घट गए हैं, लेकिन उन्हें साथ में यह भी बताना चाहिए कि उसी अवधि में बैंकों ने 5 लाख 55 हजार 603 करोड़ रुपये का कर्ज राइट ऑफ कर दिया। उन्होंने यह क्यों नहीं बताया, मैं नहीं जानता।

पूंजीपतियों व धन्नासेठों की मदद करने वाला है बजट: मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि बीजेपी की केन्द्र सरकार द्वारा बजट को हर मामले में व हर स्तर पर लुभावना बनाने की पूरी कोशिश की गई है, लेकिन देखना है कि इनका यह बजट जमीनी हकीकत में देश की आमजनता के लिए कितना लाभदायक सिद्ध होता है जबकि पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, बदतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा से पीड़ित व परेशान है।

 

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बजट में गरीबों के लिए में कुछ नहीं: राबड़ी देवी

वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा सरकार का यह बजट सिर्फ अमीर लोगों के लिए है बजट में गरीबों के लिए में कुछ नहीं है।

बजट पूरी तरह निराशाजनक एवं लक्ष्यविहीन: राजबब्बर

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजबब्बर सांसद ने केन्द्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत अपने पहले बजट में सपने तो बड़े-बड़े दिखाये गये परन्तु उसे हकीकत में बदलने के लिए कोई कार्ययोजना नहीं है, बजट पूरी तरह निराशाजनक एवं लक्ष्यविहीन है।

बजट ने आम-आदमियों को निराश किया: प्रमोद तिवारी

लखनऊ: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने केन्द्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्त मन्त्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किये गये बजट ने ढेर सारी उम्मीदे लिये बैठे देश के आम आदमी, गरीब, नौजवान, किसान और मजदूर को पूरी तरह निराश किया है।

तिवारी ने कहा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जिस एफडीआई नीति का विरोध भारतीय जनता पार्टी ने किया था, वित्त मन्त्री निर्मला सीतारमण ने शत प्रतिशत एफडीआई के लिये दरवाजे खोल दिये हैं, जो विदेशी पूंजी निवेश पर आधारित है।