पुलित्जर में कश्मीर की गूंज, इन तीन फोटोग्राफरों ने ऐसा क्या किया

कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद फीचर फोटोग्राफी करने के लिए 2020 पुलित्जर पुरस्कार से  एसोशिएट प्रेस के तीन फोटोग्राफरों  नवाजा गया है। इन तीनों ने ऐसे समय में फोटोग्राफी की थी जब अगस्त में कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद लॉकडाउन और  कर्फ्यू के दौरान संचार की सभी लाइनों को काट दिया गया था।

श्रीनगर:   कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद फीचर फोटोग्राफी करने के लिए 2020 पुलित्जर पुरस्कार से  एसोशिएट प्रेस के तीन फोटोग्राफरों  नवाजा गया है। इन तीनों ने ऐसे समय में फोटोग्राफी की थी जब अगस्त में कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद लॉकडाउन और  कर्फ्यू के दौरान संचार की सभी लाइनों को काट दिया गया था। इनके नाम डार यासीन, मुख्तार खान और चन्नी आनंद है।

 

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जब कश्मीर की कहानी दुनिया दिखा पाना बहुत ही मुश्किल था तब अपनी जान को जोखिम में डालकर  इन तीनों ने फोटोग्राफी की। तीन फ़ोटोग्राफ़रों ने विरोध प्रदर्शन, पुलिस और अर्धसैनिक कार्रवाईऔर दैनिक जीवन में घट रही घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया और इन फोटो को एजेंसी के दिल्ली ऑफिस तक पहुंचाया। एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाले यात्री को मेमोरी कार्ड ले जाने के लिए मनाते थे। इन तीनों ने बताया किइन सभी चीजों ने हमें और दृढ़ बना दिया, यासीन और खान कश्मीर के सबसे बड़े शहर श्रीनगर में हैं, जबकि आनंद पड़ोसी जम्मू जिले में है।

 

चन्नी आनंद

अवार्ड मिलने की खुशी
पत्रकारिता का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी पुरस्कार । आनंद ने कहा, “वे स्तब्ध थे और इस पर विश्वास नहीं कर पा रहा था  कि 20 साल एपी के साथ काम किया तब यह पुरस्कार मिला है। वे इसकी खुशी को जाहिर नहीं कर सकते। डार यासीन ने कहा यह केवल उन लोगों की कहानी नहीं थी जिनकी मैं शूटिंग कर रहा था यह मेरी कहानी भी है।मुझे पुरस्कार की घोषणा देखने के लिए कहा गया था, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या कहूं, यह पुरस्कार मेरे लिए महान सम्मान है।

 

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एपी के अध्यक्ष  गैरी प्रिट ने कहा, “कश्मीर के अंदर इस टीम की बदौलत दुनिया इस लंबे संघर्ष को देख पाई। उनका काम बहुत ही शानदार था।” एपी इस परंपरा को बनाए रखा। इससे पहले जब दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हो रहा था तब एपी फोटोग्राफर डीएयू नलियो चेरि और रेबेका ब्लैकवेल, हैती में पुलिस और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों के कवरेज कर रहे थे। उस समय ये लोग ब्रेकिंग न्यूज फोटोग्राफी अवार्ड के लिए पुलित्जर के लिए फाइनलिस्ट हुए थे।लेकिन इस पुरस्कार ने न केवल सम्मान दिया है बल्कि हौसला और जज्बा भी वहां के लोगों में जगाने का काम किया है। सच्चाई को दुनिया के सामने रखने का काम किया है।

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