लोकसभा चुनाव : रण में उतरे कांग्रेस के ज्यादातर दिग्गज

लोकसभा चुनाव : रण में उतरे कांग्रेस के ज्यादातर दिग्गज ......

चंडीगढ। लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में यह पहला मौका है जब प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के ज्यादातर दिग्गज चुनावी रण में डटे हुए हैं। 12 मई को राज्य की 10 सीटों के लिए मतदान है। ऐसे में इनके पास इतना भी समय नहीं है कि एक-दूसरे की मदद कर सकें। पार्टी के मीडिया विभाग के चेयरमैन रणदीप सिंह सुरजेवाला को छोड़ दें तो मुख्यमंत्री पद के ज्यादातर दावेदार चुनाव लड़ रहे हैं। यह भी पहली बार है कि कांग्रेस ने लोकसभा में पिता-पुत्र को एक साथ टिकट दिया है।
रोहतक से तीन बार के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं रोहतक से सटी सोनीपत सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उतारा है। हुड्डा सोनीपत में चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं। सोनीपत जिले की 6 और जींद जिले की 5 में से 3 सीटें सोनीपत संसदीय क्षेत्र में आती हैं। हुड्डा लगातार 10 वर्षों तक राज्य के सीएम रहे हैं और एक बार फिर सोनीपत से वाया दिल्ली चंडीगढ़ पहुंचने का नारा दे चुके हैं। वह सांसद रहते हुए गढ़ी-सांपला किलोई से विधायक निर्वाचित हुए थे और इसके बाद मार्च 2005 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

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हालांकि हुड्डा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा व रोहतक में अपने बेटे दीपेंद्र के नामांकन-पत्र जमा कराने के अवसर पर पहुंचे थे लेकिन अब वह खुद के चुनाव प्रचार में व्यस्त हो चुके हैं। अहीरवाल में चौधर का नारा देने वाले पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव गुरुग्राम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे अकेले ही ‘रामपुरा हाउस’ यानी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह से टकराते नजर आ रहे हैं। हालांकि वे भी एंटी हुड्डा खेमे के नेताओं में शुमार हैं, लेकिन खुद व बेटी के चुनाव के चलते तंवर व किरण भी उनके लिए गुरुग्राम में प्रचार नहीं कर पा रहे। फरीदाबाद से सांसद रहे और हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवतार सिंह भड़ाना को भी ‘अपनों’ का साथ नहीं मिल पा रहा।
उनसे पहले तिगांव विधायक ललित नागर को टिकट मिला था लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने नागर का टिकट बदल कर भड़ाना को मैदान में उतार दिया। भाजपा में जाने से पहले भड़ाना इनेलो में भी रह चुके हैं। उनके राजनीतिक करियर का अधिकांश समय कांग्रेस में राजनीति करते ही गुजरा है।

पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा की गिनती भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती है। नवीन जिंदल के मैदान से हटने के बाद कांग्रेस ने निर्मल सिंह को कुरुक्षेत्र से टिकट दिया है। वहीं गन्नौर से विधायक कुलदीप शर्मा करनाल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। कुलदीप के पिता चिरंजीलाल शर्मा 4 बार करनाल से सांसद रहे हैं। इन दोनों ही नेताओं की गिनती पूर्व सीएम हुड्डा के नजदीकियों में होती है। दोनों को भी हुड्डा की जरूरत पड़ेगी।
सीएम पद की दौड़ में शामिल राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा अम्बाला से चुनाव लड़ रही हैं। वे यूपीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं। शैलजा खुद के संसदीय क्षेत्र में ही चुनावी जद्दोजहद में उलझी हैं। ऐसे में उनके दूसरी सीटों पर प्रचार करने जाने की कम ही संभावना है। इसी तरह से सीएम पद के दावेदारों में शामिल कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर सिरसा से चुनाव लड़ रहे हैं। खुद को सीएम पद का उम्मीदवार बताने वाले आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई भी हिसार के चुनावी रण में व्यस्त हैं।

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बेशक, खुद कुलदीप चुनाव नहीं लड़ रहे लेकिन अपने बेटे भव्य बिश्नोई के लिए वे इलाके से बाहर नहीं निकल पा रहे। उनकी पत्नी एवं हांसी से विधायक रेणुका बिश्नोई भी हिसार संसदीय क्षेत्र में ही सिमट कर रह गई हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता व खुद को सीएम पद का उम्मीदवार प्रोजेक्ट करती रहीं किरण चौधरी भिवानी-महेंद्रगढ़ में अपनी बेटी श्रुति चौधरी की जीत सुनिश्चित करने के लिए मेहनत कर रही हैं। श्रुति लगातार तीसरी बार यहां से चुनाव लड़ रही हैं। 2009 में वे भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद रह चुकी हैं।

 

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