अब मिलेगी बड़ी राहत, इनकम टैक्स को लेकर सरकार ले सकती बड़ा फैसल

ऐसा करने के लिए कारोबारियों और सांसदों ने भी सरकार को चिट्ठी लिखी है।जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन के चलते कारोबारियों के तमाम पेमेंट जगह जगह अटके है।

नई दिल्ली:  पूरे देश में पिछले कुछ महीनों से कोरोना वायरस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। जिसके चलते देश में लगातार डेढ़ महीने से लॉकडाउन लागू चकाल रहा है। और हर सेवा और सुविधा बाधित है। इस मुश्किल घड़ी में सरकार लोगों को लगातार राहत देने प्रदान करने का प्रयास कर रही है। इसी के चलते सरकार अब TDS पर लगने वाले ब्याज पर और रियायत देने पर विचार कर रही है। देरी से TDS जमा करने पर फिलहाल 18% ब्याज देने का नियम है। जिसे सरकार ने मार्च के राहत पैकेज में आधा कर दिया था।

कारोबारियों सांसदों ने लिखी चिट्ठी

सरकार द्वारा इस संकट के समय को देखते हुए लोगों को लगातार राहत प्रदान की जा रही है। इसके चलते सरकार पहले ही टीडीएस जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ा कर 30 जून कर चुकी है और इसपर लगने वाले ब्याज की दर को भी 18 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी कर चुकी है। लेकिन लगातार लॉकडाउन और विषम परिस्थितियां बढती देख सरकार अब इसे पूरी तरह से माफ़ करने का विचार कर रही है।

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ऐसा करने के लिए कारोबारियों और सांसदों ने भी सरकार को चिट्ठी लिखी है।जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन के चलते कारोबारियों के तमाम पेमेंट जगह जगह अटके है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि चार्टर्ड अकाउंटेंट के दफ्तर बंद होने के वजह से टैक्स कैलकुलेट करना मुश्किल हो रहा है। टैक्स कैलकुलेट करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट भी नहीं मिल पा रहे है।

क्या होता है TDS

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अब हर कोई ये भी नहीं जानता होगा की TDSहोता क्या है? यहां हम आपको बताते हैं कि क्या होता है टीडीएस। टीडीएस इनकम टैक्स का एक हिस्सा है। TDS की फुल फ़ार्म होती है- TAX DIDECT AT SOURCE. यह इनकम टैक्स को आंकने का एक तरीका हैं। इनकम टैक्स से टीडीएस ज्यादा होने पर रिफंड क्लेम किया जाता है और कम होने पर अडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा करना होता है। कंपनी के केस में अगर टैक्सेबल इनकम पर देय टैक्स बुक प्रॅफिट के 15 फीसदी से कम है तो बुक प्रॉफिट को इनकम मानकर 15 फीसदी इनकम टैक्स देना होगा। और टीडीएस हर आय और हर लेन-देन पर लागू भी नहीं होता।

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