आज संसद में गूंजेंगे विरोध के स्वर, अमित शाह पेश करेंगे नागरिकता संशोधन बिल

नरेंद्र मोदी सरकार ने 60 साल पुराने नागरिकता कानून को बदलने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश करने वाले हैं। यह विधेयक लोकसभा में दैनिक कामकाज के लिए सूचीबद्ध है।

नई दिल्ली:  नरेंद्र मोदी सरकार ने 60 साल पुराने नागरिकता कानून को बदलने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश करने वाले हैं। यह विधेयक लोकसभा में दैनिक कामकाज के लिए सूचीबद्ध है। यह बिल कानून बन जाता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को सीएबी(CAB) के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।

बीजेपी ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिन्दुओं को भारत की नागरिकता देने का वादा किया था। नागरिकता संशोधन बिल ने भारत में एक बार फिर से पहचान पर विवाद बढ़ा दिया है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध  हो रहे हैं। दरअसल इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।

यह पढ़ें…खौल उठेगा खून! कलयुगी पिता की हैवानियत, नाबालिग बच्ची के साथ…

असम में इस बिल का जोरदार विरोध हो रहा है असम के कई संगठन और पार्टियां इस बिल का ये कह कर विरोध कर रही हैं। असम में चर्चा है कि ये बिल कानून बनने के बाद 1985 में हुए असम समझौते के प्रावधानों पर असर होगा। असम में 24 मार्च 1971 से पहले आए लोगों को असम की नागरिकता दी गई थी।

कांग्रेस शुरू से ही इस बिल का विरोध कर रही है। पार्टी ने इस बिल को असंवैधानिक करार दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि  सेकुलर देश में धर्म के आधार नागरिकता देना अनुचित है। रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर संसदीय दल की बैठक के बाद पार्टी ने बिल का विरोध करने का फैसला किया है।

कांग्रेस ने पहले ही फैसला कर लिया है कि इस बिल का विरोध करने के लिए वह समान सोच वाली पार्टियों से बातचीत करेगी। कांग्रेस ने तो सीएबी के विरोध का फैसला कर लिया है, लेकिन अब शिवसेना इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है, ये देखना महत्वपूर्ण है।

 

वामपंथी पार्टियों ने भी इस बिल का विरोध करने का निर्णय किया है और वे इसमें संशोधन चाहते हैं। सीपीआई ने कहा है कि वह बिल से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का नाम हटाना चाहती है और वह चाहती है कि किसी भी पड़ोसी देश के शरणार्थी को इस बिल में शामिल किया जाए।

इधर लोकसभा में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत है। इसलिए विपक्ष के विरोध के बावजूद बीजेपी को लोकसभा से इस बिल को पास कराने में कोई परेशानी नहीं होगी। 545 सदस्यों वाली लोकसभा में बीजेपी के 303 सदस्य हैं। तो बिल पास हो जाएगा ऐसी उम्मीद है।