हैदराबाद केस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने ऐसी बात कह सभी को चौंका दिया

हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की आलोचना की है।

नई दिल्ली: हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की आलोचना की है।

जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी आनन-फानन में किया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल चरित्र खो देता है।

जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, “मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए, मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है”। इस दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी वहीं मौजूद थे।

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दो वकीलों ने दायर की याचिका

हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ बर्बरता करने वाले चारों आरोपियों को तेलंगाना पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। यह मामला उच्चतम न्ययालय पहुंच गया है। वकील जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने इस मुठभेड़ के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

वकीलों का क्या है कहना?

वकीलों का कहना है कि अदालत के 2014 में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने मुठभेड़ में शामिल रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर, जांच और कार्रवाई की मांग करने के लिए याचिका दायर की है।

मुठभेड़ को लेकर अदालत में एक और याचिका दाखिल की गई है। जिसमें अदालत की निगरानी में एक एसआईटी गठित करने की मांग की गई है।

याचिका को वकील एमएल शर्मा ने दाखिल किया है। उन्होंने जया बच्चन और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ न्यायिक हत्यारों का समर्थन करने के लिए कार्रवाई करने की भी मांग की है।

बता दें कि शुक्रवार सुबह साइबराबाद पुलिस ने मुठभेड़ में दुष्कर्म के चारों आरोपियों को ढेर कर दिया था। पुलिस इन्हें घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएशन के लिए ले गई थी। पुलिस का कहना है कि इन्होंने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में मारे गए।

 9 दिसंबर तक शव सुरक्षित रखे जाएं: हाईकोर्ट

हैदराबाद की महिला वेटेनरी डॉक्टर से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या मामले के चार आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराने की घटना के खिलाफ तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि आरोपियों के शव 9 दिसंबर तक सुरक्षित रखे जाएं। ये अपील स्वतंत्र कार्यकर्ताओं के एक समूह ने की है। इससे पहले देश भर में इस एनकाउंटर पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं आईं।

जहां ज्यादातर लोग इस एनकाउंटर के समर्थन में दिखे, तो वहीं कई नेताओं और दूसरे लोगों ने इसे गलत बताया और कहा, कोर्ट के न्याय की जगह बंदूक का न्याय नहीं ले सकता।

जांच के पूरा होने का इंतजार करना चाहिए: कांग्रेस

कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि महिला पशु चिकित्सक के साथ बलात्कार और उसकी निर्मम हत्या के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना को लेकर मजिस्ट्रेट की जांच पूरी होने के बाद कोई रुख तय किया जा सकता है।

पार्टी सांसद अमी याग्निक ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘मजिस्ट्रेट की जांच हो रही है। मैं अभी से यह नहीं कह सकती कि क्या नतीजा आएगा। हमें इस जांच के पूरा होने का इंतजार करना चाहिए।

’बता दें कि हैदराबाद में पशु-चिकित्सक के सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए चार आरोपी शुक्रवार को सुबह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। साइबराबाद पुलिस आयुक्त वी सी सज्जनार ने कहा कि चारों आरोपी पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए. मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।

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हैदराबाद मुठभेड़ पर बंटे पुलिस अधिकारी

हैदराबाद की पशु चिकित्सक से सामूहिक बलात्कार एवं उसकी हत्या मामले के चार आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराने की घटना को शुक्रवार को जहां कई मौजूदा और पूर्व पुलिस अधिकारियों ने सही ठहराया है, वहीं कुछ ने इसकी निंदा की।

कर्नाटक में बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने मुठभेड़ का बचाव करते हुए इसे ‘सही और वक्त पर की गई कार्रवाई’ करार दिया। राव ने कहा कि यदि आरोपी हिरासत से फरार हो जाते तो पुलिस पर बेहद दबाव बढ़ जाता।

राव ने कहा, ‘हैदराबाद/ साइराबाद पुलिस की कार्रवाई सही और समय पर की गई। कोई दूसरी राय नहीं हो सकती है। अगर वे (आरोपी) हिरासत से भाग जाते तो वे (पुलिस) जर्बदस्त दबाव में आ जाती। यह घटना जांच के दौरान हुई है और इसका बचाव करने की जरूरत है. साइबराबाद पुलिस ने जरूरी कार्रवाई की है।

 

किसने क्या कहा?

आईपीजी और बेंगलुरु नगर पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) निम्बलकर ने कहा, ‘सोशल मीडिया थोड़ा सब्र करो! बलात्कार का अपराध और आज की मुठभेड़ दो अलग अलग तथ्य हैं। जैसा कहा गया है यह आत्म रक्षा में किया गया कदम है न कि बलात्कार के आरोपियों को सजा है।

तेलंगाना पुलिस कानूनी जांच के दायरे में आती है। जिनका विश्वास लोकतंत्र और कानून की व्यवस्था में है, उन्हें इंतजार करना चाहिए।’ उत्तर प्रदेश के बागपत से भाजपा के सांसद और मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त सत्यपाल सिंह ने मुठभेड़ को सही ठहराया।

उन्होंने ट्विटर पर कहा, ‘दिलेरी के साथ स्थिति से निपटने के लिए मैं हैदराबाद पुलिस को बधाई देता हूं। अगर आरोपी हिरासत से भाग जाते तो यह खाकी पर बड़ा धब्बा होता जय हिंद।‘

शव लेने से इनकार

हैदराबाद गैंगरेप के चारों आरोपियों के परिवार वालों ने उनके शव को लेने से इनकार कर दिया है। बता दें कि शुक्रवार की सुबह पुलिस ने एनकाउंटर में उन्हें मार गिराया था। इसके बाद पुलिस उनके शव को परिजनों को देने की तैयारी में थी लेकिन उनके परिजनों ने शवों को लेने से इनकार कर दिया।‘

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि 28 नवंबर को इन चार आरोपियों की जिनकी उम्र 20 से 26 साल के बीच थी. महिला डॉक्टर को टोल बूथ पर स्कूटी पार्क करते देखा था। आरोप है कि इन लोगों ने जानबूझकर उसकी स्कूटी पंक्चर की थी।

इसके बाद मदद करने के बहाने उसका एक सूनसान जगह पर लेकर गैंगरेप किया और बाद में पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया। पुलिस के मुताबिक घटना से पहले इन लोगों ने शराब भी पी रखी थी। रेप और मर्डर की इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्सा था और इस मामले की सुनवाई के लिए फॉस्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था।

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