भारत का जंगी जहाज: आज नौसेना में होगा शामिल, खासियत ऐसी कि डरेगी दुनिया

आज नौसेना के बेड़े में स्वदेशी आईएनएस कवरत्ती शामिल होने जा रहा है। इस पोत को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

Kavaratti

आज नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा INS कवरत्ती (फोटो- ट्विटर)

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच आज भारतीय नौसेना (Indian Navy) की ताकत में इजाफा होने वाला है। दरअसल, आज नौसेना के बेड़े में स्वदेशी आईएनएस कवरत्ती (INS Kavaratti) शामिल होने जा रहा है। पनडुब्बी रोधी प्रणाली से लैस इस INS Kavaratti को भारतीय सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (General MM Naravane) नौसेना के बेड़े में शामिल करने वाले हैं। 

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

बता दें कि आईएनएस कवरत्ती पोत को मेड इन इंडिया (Made In India) है और इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। इसे भारतीय नौसेना के संगठन डायरेक्टॉरेट ऑफ नेवल डीजाइन (DND) ने डिजाइन किया है। वहीं इसका निर्माण कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा किया गया है। वहीं इसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने से नेवी की ताकत में काफी इजाफा होगा।

 

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पनडुब्बियों का पता लगाने और पीछा करने में सक्षम

गौरतलब है कि चीन के साथ जारी तनाव के बीच सरकार तीनों भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ाने में जुटी हुई है। आईएनएस कवरत्ती इस ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं आईएनएस कवरत्ती के बारे में अधिकारियों ने बताया कि ये अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है। इसमें ऐसे सेंसर का इस्तेमाल किया गया है जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम हैं।

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प्रोजेक्ट-28 के तहत आखिरी जहाज

बता दें कि यह यह प्रोजेक्ट-28 के तहत स्वदेशी निर्मित चार एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) स्टील्थ पोत में से आखिरी जहाज है। इससे पहले तीन पोत नौसेना को सौंपे जा चुके हैं। आज मेड इन इंडिया युद्धपोत भारतीय नेवी में शामिल होने जा रहे हैं तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर क्या है इसकी खासियतें-

क्या है आईएनएस कवरत्ती की खासियतें?

पनडुब्बी रोधी प्रणाली से लैस आईएनएस कवरत्ती (INS Kavaratti) में  सेल्फ डिफेंस क्षमता से भी लैस है। 

यह लंबी दूरी के अभियानों के लिए बेहतरीन मजबूती रखता है।

आईएनएस कवरत्ती में 90 फीसदी उपकरण मेड इन इंडिया हैं। 

यह पोत परमाणु, रासायनिक और जैविक युद्ध के हालात में भी काम करने में सक्षम होगा।

इसकी लंबाई 109 मीटर और चौड़ाई 12.8 मीटर है।

इस पोत को अत्याधुनिक हथियारों, रॉकेट लॉचर्स, सेंसर और एकीकृत हेलीकॉप्टर्स से भी लैस किया गया है।

वहीं इसके सुपरस्ट्रक्चर के लिए कार्बन कंपोजिट का इस्तेमाल हुआ है, जो कि भारतीय पोत निर्माण के इतिहास में बड़ी सफलता है।

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