कौन हैं ईश्वरचंद्र विद्यासागर, जिनकी मूर्ति तोड़े जाने पर बंगाल में बवाल है

कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा में कॉलेज परिसर में स्थित महान दार्शनिक, समाजसुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़ दी गई। इसके लिए सूबे की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है।

Published by Rishi Published: May 15, 2019 | 12:38 pm
Modified: May 15, 2019 | 1:57 pm

लखनऊ : कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा में कॉलेज परिसर में स्थित महान दार्शनिक, समाजसुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़ दी गई। इसके लिए सूबे की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ईश्वर की फोटो अपनी डीपी बना ली है।

ये भी देखें : तमिलनाडु: मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने गठबंधन पर ‘दोहरे मानदंड’ के लिए स्टालिन की निंदा की

ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को कोलकाता में हुआ।

विद्यासागर का जन्म पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के गरीब परिवार में हुआ था।

पिता का नाम ठाकुरदास बन्धोपाध्याय और माता का नाम भगवती देवी था।

पढ़ाई में अच्छे होने की वजह से उन्हें कई संस्थानों से छात्रवृत्तियां मिली थीं। वह काफी विद्वान थे जिसके कारण उन्हें विद्यासागर की उपाधि दी गई थी।

समाज सुधारक, शिक्षा शास्त्री और स्वाधीनता सेनानी थे। उन्होंने कई महिला विद्यालयों की स्थापना की।

साल 1848 में वैताल पंचविंशति नामक बंगला भाषा की प्रथम गद्य रचना का भी प्रकाशन किया था।

साल 1839 में विद्यासागर ने कानून की पढ़ाई पूरी की।

ये भी देखें : मोदी का विरोधियों पर वार, ”घोर नकारात्मकता के साथ चुनाव लड़ रहे महामिलावटी”

21 साल की उम्र में साल 1841 में उन्होंने फोर्ट विलियम कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर दिया था। यहां पांच साल तक अपनी सेवा देने के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया और संस्कृत कॉलेज में सहायक सचिव के तौर पर नियुक्त हुए।

जब उन्हें संस्कृत कालेज का प्रधानाचार्य बनाया गया तो उन्होंने सभी जाति के बच्चों के लिए कॉलेज के दरवाजे खोल दिए।

उनके प्रयास-प्रचार का नतीजा था कि विधवा पुनर्विवाह कानून-1856 पारित हुआ।

उन्होंने खुद एक विधवा से अपने बेटे की शादी करवाई थी। उन्होंने बहुपत्नी प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ भी आवाज उठाई थी।