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भारतीय सेना ने तीन सालों में मार गिराए 635 आतंकी, कांपे दहशतगर्द

गृह मंत्रालय ने 2018, 2019, 2020 में हुए आतंकवादी हमले और सीजफायर उल्लंघन के मामले की जानकारी दी है। इसके साथ मंत्रालय ने किसान आंदोलन, नक्सली समेत कई बड़े मुद्दों के बारे में बताया है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 2 Feb 2021 4:11 PM GMT

भारतीय सेना ने तीन सालों में मार गिराए 635 आतंकी, कांपे दहशतगर्द
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तीन सालों में सीजफायर उल्लंघन के मामले बढ़े हैं, लेकिन आतंकी हमलों में कमी आई है। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। बीते तीन सालों में सीजफायर उल्लंघन के मामले बढ़े हैं, लेकिन आतंकी हमलों में कमी आई है। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

गृह मंत्रालय ने 2018, 2019, 2020 में हुए आतंकवादी हमले और सीजफायर उल्लंघन के मामले की जानकारी दी है। इसके साथ मंत्रालय ने किसान आंदोलन, नक्सली समेत कई बड़े मुद्दों के बारे में बताया है।

गृहमंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 में सीजफायर उल्लंघन के 5133 मामले सामने आए थे। इनमें 22 आम नागरिकों की जान चली गई, तो वहीं 71 लोग घायल हो गए थे। इस सीजफायर उल्लंघन में सुरक्षाबलों के 24 जवान शहीद हुए और 126 जवान घायल। 2019 में पाकिस्तान ने 3479 बार सीजफायर का उल्लंघन किया जिसमे 18 आम नागरिकों ने दम तोड़ दिया जबकि 19 जवान शहीद हो गए थे। साल 2018 में सीजफायर की कुल 2140 मामले सामने आए।

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Indian Army

गृह मंत्रालय के मुताबिक, साल 2018 में 614 आतंकी हमले हुए थे इनमें 39 नागरिक की मौत हो गई। इन घटनाओं में 91 जवान शहीद हो घए। लेकिन साल 2020 में आतंकवादी घटनाओं में कमी देखी गई। बीते साल 244 आतंकी हमले हुए। इन हमलों में सुरक्षाबलों के 62 जवान शहीद हो गए, तो वहीं 37 आम नागरिकों की जान चली गई। सुरक्षाबलों ने साल 2020 में 221 आतंकवादियों को मार गिराया था। 2018 में 257 और 2019 में 157 आतंकी मारे गए थे। तीन सालों में सेना के 305 जवान शहीद हुए थे।

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इस साल सबसे अधिक मौतें

गृह मंत्रालय के आंकड़ों में बताया गया है कि सीजफायर उल्लंघन और आतंकवादी हमलों की वजह से सबसे अधिक मौतें साल 2018 में हुईं। इस दौरान सीजफायर उल्लंघन में कुल 59 लोगों की मौत हुई। आतंकवादियों के चलते 130 लोगों को मौत हुई। लेकिन साल 2020 में इन दोनों तरह की घटनाओं में काफी कमी आई।

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सेना ने तीन सालों में 635 आतंकवादियों को मार गिराया। सीजफायर से जुड़ी घटनाओं में तीन साल में 70 आम नागरिकों की जान गई है। आतंकी हमलों में 115 लोगों की मौत हो गई।

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