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जवान बने मसीहा: महिला को मिला जीवन-दान, अस्पताल में सुनाई दी किल-कारी

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में ऐसा वाकया हुआ जब एक गर्भवती महिला को सेना के जवानों ने अपने कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया। जहां उस महिला ने एक बेटी को जन्म दिया। सही समय पर जवानों के सहायता से जच्चा और बच्चा दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ्य है।

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Updated on: 12 March 2021 11:44 AM GMT
जवान बने मसीहा: महिला को मिला जीवन-दान, अस्पताल में सुनाई दी किल-कारी
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भारतीय सेना के जवान एक तरफ जहां देश की सरहदों की सुरक्षा करती है, वहीं दूसरी तरफ अपना कर्तव्य निभाने के साथ ही मजबूरी में फंसे लोगों की सहायता भी करती है।
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जम्मू। भारतीय सेना के जवान एक तरफ जहां देश की सरहदों की सुरक्षा करती है, वहीं दूसरी तरफ अपना कर्तव्य निभाने के साथ ही मजबूरी में फंसे लोगों की सहायता भी करती है। हाल ही में कुछ ऐसा वाकया सामने आया है जम्मू-कश्मीर से। यहां कुपवाड़ा में एक गर्भवती महिला को सेना के जवानों ने अपने कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया। जहां उस महिला ने एक बेटी को जन्म दिया। सही समय पर जवानों के सहायता से जच्चा और बच्चा दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ्य है।

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एम्बुलेंस रास्ते में ही फंस गई

कुपवाड़ा जिले में शकीना बेगम को शुक्रवार सुबह प्रसव पीड़ा में एम्बुलेंस से नुनवानी गांव से कालारूस अस्पताल में भेजा गया। भयंकर बर्फबारी और संकारी सड़क की वजह से एम्बुलेंस रास्ते में ही फंस गई। तभी सेना के जवानों ने कंधे पर उठाकर महिला को अस्पताल पहुंचाया। और सही समय पर अस्पताल पहुंच जाने से महिला ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया।

दरअसल जब एम्बुलेंस फंस गई तो आशा कार्यकर्ता ने आर्मी के कालारूस कंपनी के मेजर मुकेश से मदद मांगी। सेना के जवान तुरंत मदद के लिए रवाना हो गए, लेकिन सेना की गाड़ी एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच सकी।

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कंधों पर लाए

ऐसे में समय की नजाकत को देखते हुए जवान वाहन से बाहर निकलकर पैदल एम्बुलेंस तक पहुंचे। इस दौरान अंधेरी रात और बर्फबारी में महिला को सावधानी से स्ट्रेचर पर बाहर लाए। फिर जवानों ने लगभग 300 मीटर का सफर तय किया और महिला को स्ट्रेचर के जरिए सेना की जिप्सी तक कंधों पर लाए और उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

जैसे ही अस्पताल में बच्ची के जन्म की खबर मिली, महिला के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि यदि महिला को कंधों पर उठाकर अस्पताल नहीं लाया जाता तो मां और बच्चे दोनों गंभीर खतरे में पड़ सकते थे।

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