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JNU की बड़ी सच्चाई: जानिए कौन हैं ये दंगाई, कहां है इनका ठिकाना

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित प्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। धरने-प्रदर्शन और...

Deepak Raj

Deepak RajBy Deepak Raj

Published on 21 Jan 2020 11:13 AM GMT

JNU की बड़ी सच्चाई: जानिए कौन हैं ये दंगाई, कहां है इनका ठिकाना
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में स्थित प्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। धरने-प्रदर्शन और मारपीट की घटनाओें को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बने इस विश्वविद्यालय में भारत के अलावा 48 देशों के 301 विदेशी स्टूडेंटस पढ़ते हैं।

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 82 स्टूडेंटस के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को यह पता नहीं है कि वे कौन से देशों के हैं।

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यह खुलासा हुआ है कोटा के सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी की ओर से लगाई गई एक आरटीआई अर्जी पर दिए गए जवाब से। सुजीत ने हाल ही में 5 जनवरी को जेएनयू में एक आरटीआई लगाकर कुछ सवालों के जवाब मांगे थे।

14 जनवरी को जेएनयू से जवाब आया

इन सवालों के जवाब में 14 जनवरी को जब जेएनयू से जवाब आया तब इस बात खुलासा हुआ। सुजीत ने जेएनयू में कितने स्टूडेंटस अध्ययनरत हैं, किस-किस प्रोग्राम में कितने स्टूडेंटस हैं, कितने विदेशी स्टूडेंटस हैं, वे किस-किस देश से आए हैं और वे किस कोर्स में पढ़ रहे हैं समेत कुछ अन्य सवालों के जवाब मांगे थे।

सुजीत के इन्हीं सवालों की जानकारी में जेएनयू प्रशासन ने चौंकाने वाली यह जानकारी दी है। 48 देशों के 301 विदेशी स्टूडेंटस पढ़ते हैं जेएनयू ने सुजीत के सवालों के जवाब में बताया कि यहां 48 देशों के 301 विदेश स्टूडेंटस पढ़ते हैं।

82 स्टूडेंटस के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को नहीं है पता

उनमें से 82 स्टूडेंटस के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को यह पता नहीं है कि वे कौनसे देशों के मूल निवासी हैं। इन 82 स्टूडेंटस की नागरिकता की जगह लिखा है 'नॉट अवेलेबल'। सुजीत का कहना है कि ये विदेशी स्टूडेंट्स 78 अलग-अलग कोर्स में पढ़ रहे हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता सुजीत ने बताया कि इन 82 विदेशी छात्रों को 'नॉट अवेलेबल' की श्रेणी में दर्शाया गया है। इसका मतलब है कि इन स्टूडेंट्स की राष्ट्रीयता की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन के पास नहीं है।

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ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि इन स्टूडेंट्स को प्रवेश कैसे दे दिया गया? यह देश की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। इनकी राष्ट्रीयता की जानकारी क्यों नहीं ली गई? यह मौजूदा वर्ष का डाटा है।

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