जानिए कौन सी सैटेलाइट चांद की कक्षा में पहुंचा महज 8 घंटे में

एक सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।

नई दिल्ली: इसरो का दूसरा मून मिशन चंद्रयान-2, देश के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV-MK3 से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया । यह लांचिंग आज 22 जुलाई की दोपहर 2.43 बजे की गयी । ताज़ी रिपोर्ट के अनुसार चंद्रयान-2, 16.23 मिनट के अंदर ही पृथ्वी से करीब 182 किमी. की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू कर चुका है।

चंद्रयान-2 को लगेंगे 48 दिन  महज 8 घंटे में पहुंची थी NASA की ये सैटेलाइट

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चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।  इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा से होकर गुजरेगा ।

19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा

चंद्रयान-2 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा।  इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।

1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा

एक  सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।

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आइए अब हम आपको बताते हैं,  दुनियाभर के उन अभियानों के बारे में, जो चांद पर सबसे तेजी से और सबसे धीमे  पहुंचे

सबसे लंबी यात्रा वाला मानवरहित मून मिशन

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ESA के स्मार्ट-1 लूनर प्रोब को 27 सितंबर 2003 में लॉन्च किया गया था। यह 1 साल, 1 महीना और 2 हफ्ते के बाद 11 नवंबर 2004 को चांद की कक्षा में पहुंचा था। यह चांद पर भेजा जाने वाला सबसे लंबा मून मिशन है।

सबसे कम समय वाला मानवरहित मून मिशन

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा  ने 2006 में प्लूटो के लिए न्यू होराइजन नाम का एक सैटेलाइट लॉन्च किया था । इसे एटलस-5 रॉकेट से छोड़ा गया था । यह न्यू होराइजन 16.26 किमी प्रति घंटा की गति से अंतरिक्ष में चल रहा था । यह चांद की कक्षा में सिर्फ 8 घंटे 35 मिनट में ही पहुंच गया था । लेकिन इसे चांद पर नहीं जाना था. इसलिए ये वहां से होकर गुजर गया ।

सबसे कम समय में चांद पर पहुंचने वाला मानवयुक्त मून मिशन

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अमरेकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा  ने 16 जुलाई 1969 को चांद के लिए पहला मानवयुक्त  मिशन भेजा। इस मिशन में गए एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन मात्र 51 घंटे 49 मिनट बाद चांद की कक्षा में पहुंच गए थे ।  लेकिन चांद की सतह पर 109 घंटे 42 मिनट बाद उतरे थे। इन देशों के मून मिशन भी कम समय में पहुंच चांद पर चीन के मिशन भी कुछ ही दिनों में पहुंच चुके हैं चांद तक

चीन का चांग-1 मून मिशन 24 अक्टूबर 2007 को छोड़ा गया था। 31 अक्टूबर तक यह पृथ्वी की कक्षा में रहा लेकिन उसके बाद वहां से चांद पर पहुंचने में इसे सिर्फ 5 दिन लगे। चीन के ही चांग-2 ऑर्बिटर ने चांद की दूरी 4 दिन 16 घंटे में पूरी कर ली थी। चांग-3 मून मिशन 1 दिसंबर 2013 को छोड़ा गया। यह चांद पर 4 दिन 12 घंटे और 23 मिनट में पहुंच गया था।

सोवियत रूस का लूना-1 सबसे पहले चांद पर सबसे कम समय में पहुंचा था

सोवियत रूस ने सबसे पहले अपना मून मिशन लूना-1 सबसे कम समय में पहुंचाया था। 2 जनवरी 1959 में लॉन्च किया गया लूना-1 सिर्फ 36 घंटे में चांद की कक्षा में पहुंच गया था। यह करीब 3 किमी प्रति सेकंड की गति से उड़ रहा था।

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