कांप उठा चीन: राफेल ने पूरी कर ली जंग की तैयारी, एक्शन में देश की सेना

पहाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित युद्ध की तैयारी के लिए वायुसेना के पायलट हिमाचल प्रदेश में राफेल जेट के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं।

Published by Aradhya Tripathi Published: August 10, 2020 | 4:17 pm
Rafale

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नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा (LAC) पर अभी भी तनाव जारी है। जिसको लेकर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। भले ही मामला इस समय ठंडा हो लेकिन कहीं न कहीं अंदरूनी तनाव बना हुआ है। ऐसे में फ्रांस से लाए गए राफेल फाइटर जेट के साथ भारतीय वायुसेना के पायलट हिमाचल की पहाड़ियों में उड़ाने का अभ्यास कर रहे हैं। ऐसे में कहीं न कहीं भारतीय सेना युद्ध के लिए खुद को तैयार कर रही है और अपना अभ्यास कर रही है।

राफेल ने किया रात में अभ्यास

एक मीडिया प्रकाशन की रिपोर्ट के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित युद्ध की तैयारी के लिए वायुसेना के पायलट हिमाचल प्रदेश में राफेल जेट के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। संभव है कि ये इसलिए हो रहा है कि अगर लद्दाख सेक्टर में 1,597 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति बिगड़ती है तो पायलट किसी भी एक्शन के लिए तैयार रहें। फिलहाल फ्रांस से मिले पांच राफेल विमान हिमाचल की पहाड़ियों में रात में अभ्यास कर रहे हैं। इससे ये साफ ज़ाहिर हि कि भारत अब किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूपरी तरह से तैयारी कर रहा है।

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ये राफेल इसलिए भी पहाड़ियों में रात को अभ्यास कर रहे हैं ताकि हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल और SCALP (हवा से जमीन पर) जैसे हथियारों के साथ गोल्डन एरो स्क्वाड्रन किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहें। गौरतलब है कि भारत सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल फाइटर जेट खरीदने का अनुबंध किया है। इस डील के तहत पहले चरण में भारतीय वायुसेना को 5 राफेल विमान मिल गए हैं जो 29 जुलाई को अंबाला पहुंचे थे।

राफेल को रखा जा रहा LAC से दूर

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वहीं एक मीडिया प्रकाशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पहाड़ी इलाके में अभ्यास कर रहे राफेल फाइटर जेट्स को LAC से दूर रखा जा रहा है। इसका कारण ये है कि चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के रडार से उसकी फ्रीक्वेंसी की पहचान न हो जाए। फाइटर जेट विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल का इस्तेमाल लद्दाख सेक्टर में प्रशिक्षण के लिए भी किया जा सकता है। क्योंकि ये सभी लड़ाकू विमान प्रोग्रामेबल सिग्नल प्रोसेसर (पीएसपी) या शत्रुता की स्थिति में सिग्नल फ्रीक्वेंसी को बदलने की क्षमता से लैस हैं।

Peoples Libration Army
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विशेषज्ञों ने भी बताया कि भले ही चीनी सेना ने स्पष्ट इलेक्ट्रॉनिक लाइन ऑफ़ व्यू के लिए अक्साई चीन क्षेत्र में पहाड़ की चोटी पर अपने इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस रडार को तैनात कर रखा है। लेकिन राफेल युद्ध के समय दूसरी फ्रीक्वेंसी पर काम कर सकता है। चीन ने विमानों को पकड़ने के लिए जो रडार लगाए हैं वो अच्छे हैं क्योंकि उसने अमेरिकी वायु सेना को ध्यान में रखते हुए उसका निर्माण किया है। वहीं राफेल में Meteor और Scalp missile लगी हुई हैं। यह एयर-टू-एयर मिसाइल, विजुअल रेंज जैसी ताकत से लैस होगी। यानी कि पायलट विजुअल रेंज के बाहर भी दुश्मनों के ठिकाने और विमान पर हमला करने में सक्षम होंगे।

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