बाप रे, इतनी खतरनाक टिड्डियां, 24 घंटे ड्रोन से रखनी पड़ रही नजर

राजस्थान और इसके आस-पास के जिलों में टिड्डियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि अब ड्रोन से इनकी निगरानी की जा रही है। जहां पर जरूरत पड़ रही है वहां ड्रोन की मदद से दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है।

जयपुर: राजस्थान और इसके आस-पास के जिलों में टिड्डियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि अब ड्रोन से इनकी निगरानी की जा रही है। जहां पर जरूरत पड़ रही है वहां ड्रोन की मदद से दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है।

कृषि विभाग और टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) ने शनिवार रात को जयपुर जिले में विराटनगर के पास छिंड, बिहाझर और जोधुला में अभियान चलाकर 150 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों पर काबू पाया।

यहां काफी दुर्गम और पहाड़ी इलाका होने के कारण से ड्रोन की मदद से कीटनाशक छिड़काव किया गया। आज सुबह तक चले अभियान में यहां 50 लीटर कीटनाशक का छिड़काव कर 105 हेक्टेयर में टिड्डियों पर काबू पाया गया। इसके अलावा एलडब्ल्यूओ के 4 वाहनों और 3 ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर का छिड़काव किया गया।

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यूपी में भी खतरा बरकरार

उधर उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी टिड्डियों का खतरा बढ़ा है। जिसको देखते हुए कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने उनके नियंत्रण के लिए जनपदीय अधिकारियों को लोकस्ट वार्निंग आर्गनाइजेशन की तकनीकी टीम व क्षेत्रीय निवासियों व कृषकों से निरन्तर समन्वय बनाये रखने के निर्देश दिये हैं।

उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों और केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्रों लखनऊ, गोरखपुर तथा आगरा का भी सहयोग लेने के भी निर्देश दिये। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल प्रायः दिन डूबने के समय किसी न किसी पेड़, पौधों पर दिन निकलने तक आश्रय लेती है।

उन्होंने सघन सर्वेक्षण द्वारा आश्रय चिन्हित करने के निर्देश दिये। उत्तर प्रदेश में राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में टिड्डी दल के प्रकोप को देखते हुए उनके नियंत्रण के लिए किये जा रहे उपायों की समीक्षा करते हुए शाही ने कहा कि टिड्डी दल के हमले पर एक साथ इकट्ठा होकर ढोल, नगाडों, टीन के डिब्बों, थालियों आदि को बजाते हुए शोर मचाने की एडवाइजरी जारी कर दी गई है।

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