कैबिनेट का बड़ा फैसला: NBFCs व HFC सेक्टर को मिली राहत, जाने क्या होगा असर?

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई इसमें दो बड़े फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर (HFC) को राहत दी है। कैबिनेट ने दोनों सेक्टर में नकदी बढ़ाने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम को आसान किया है।

नई दिल्ली :  पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई इसमें दो बड़े फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर (HFC) को राहत दी है। कैबिनेट ने दोनों सेक्टर में नकदी बढ़ाने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम को आसान किया है।
इसमेंअब NBFC और HFC के BBB+ रेटिंग वाले एसेट्स को सरकारी बैंक खरीद सकेंगे। सरकारी बैंक खरीदेंगे तो उसके एवज में कर्ज मिलेगा। पहले शर्त ये थी कि सिर्फ AA+ रेटिंग वाले एसेट्स ही खरीदने होंगे। एनबीएसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को नकदी मिलने से रियल एस्टेट सेक्टर के साथ घर खरीदारों को भी राहत मिलेगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को इंस्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) बनाने की मंजूरी दे दी है।

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इससे NHAI के प्रोजेक्ट को मोनेटाइज करने का रास्ता आसान हो जाएगा और NHAI के पास आइडेंटिफाइड हाइवे पर टोल वसूलने का अधिकार रहेगा। वहीं, इंफ्रास्क्ट्रक्चर सेक्टर के लिए आईआईएफसीएल (IIFCL) के लिए पूंजी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। IIFCL के लिए ऑथोराइज्ड कैपिटल और इक्विटी सपोर्ट में बढोतरी करने का फैसला हुआ। वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार IIFCL को अतिरिक्त 5,300 करोड़ रुपये मुहैया कराएगी

इसके अलावा एयरक्राफ्ट एक्ट( Aircraft Act 1934 ) में बदलाव करने का फैसला भी लिया गया है। एविएशन सेक्टर में रेगुलेशन को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए जरूरी प्रावधान करने का भी निर्णय लिया गया है। साथ ही दिल्ली मेट्रो फेज 4 के लिए फंडिंग की शर्तों में बदलाव करने का निर्णय भी लिया गया है। BBB+ रेटिंग वाले एसेट्स क्वालिटी के लिहाज से पांचवें पायदान पर होते हैं । हालांकि इसमें शर्त ये होती है कि सरकार इसमें गारंटी देती है 10 फीसदी की कीमत का। अगर वो एनपीए होता है तो वो 10 फीसदी की भरपाई सरकार करेगी। लेकिन इसकी गारंटी सिर्फ 24 महीने की होगी। चालू कारोबारी साल में 1 लाख करोड़ रुपये के एसेट खऱीदने का लक्ष्य है। ये स्कीम 6 महीने या 1 लाख करोड़ रु तक के एसेट पूरा होने तक जारी रहेगी।