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एनबीआरआई ने शुरू किया मिशन लोट्स

वैभव की देवी लक्ष्मी के आसन और राष्ट्रीय पुष्प कमल को पोषण और आय का मुख्य स्रोत बनाने के अभियान को अंजाम देने में राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) ने मिशन लोट्स की शुरुआत की है।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 10 Feb 2020 10:09 AM GMT

एनबीआरआई ने शुरू किया मिशन लोट्स
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योगेश मिश्र

लखनऊ: वैभव की देवी लक्ष्मी के आसन और राष्ट्रीय पुष्प कमल को पोषण और आय का मुख्य स्रोत बनाने के अभियान को अंजाम देने में राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) ने मिशन लोट्स की शुरुआत की है। चीन, साउथ अमेरिका, कनाडा, जापान में कमल को न्यूट्रास्यूटिकल की तरह उपयोग करते हैं। इसी को ध्यान में रखकर एनबीआरआई ने कमल को व्यावसायिक खेती के लिए चुना है।

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मिशन लोट्स के तहत एनबीआरआई के वैज्ञानिकों ने कमल को तालाब की जगह मेड़ बनाकर गेहूं के तरह उगाने की तकनीक विकसित कर ली है। कमल के बीज में प्रोटीन, बिटामिन बी, मैगनीज और फास्फोरस मिलता है। जबकि उसके तने में प्रोटीन और विटामिन के साथ प्रचुर मात्र में खनिज मौजूद होता है। एनबीआरआई के निदेशक प्रोफेसर एसके बारिक बताते हैं कि कमल के तने का प्रयोग सब्जी की तरह होता है। इसके बीज भी खाए जाते हैं। इसके स्टेम बेहद पौष्टिक होते हैं। इसमें न्यूट्रीशनल वैल्यू बहुत होती है।

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इसे देखते हुए एनबीआरआई ने इसकी न्यूट्रीशनल प्रोफाइल तैयार करना शुरू किया है। अब वह जर्म प्लाजा बढ़ाएगा। बायोप्रोस्पेक्शन के मार्फत कमल की चुनिंदा किस्मों की पहचान की जाएगी। एनबीआरआई ने कमल से बनने वाले उत्पादों की तकनीक विकसित करने पर भी काम शुरू किया है। पानी की बाहुलता वाले जिन इलाकों में किसान धान की खेती करते हैं, वहां कमल की खेती की जा सकेगी। कनाडा, जापान और चीन में कमल की खेती करके किसान काफी कमाई कर रहे हैं।

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