कर्ज में डूबी ये एयरलाइंस: संपत्ति बेचने को मजबूर, NCLT ने दी मंजूरी

एयरलाइन कंपनी पर विभिन्‍न बैंकों और कर्जदाताओं का करीब 8,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इनमें सरकारी बैंकों की बड़ी हिस्‍सेदारी है।

नई दिल्‍ली:  इस समय एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत की प्रमुख एयरलाइंस जेट एयरवेज को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल ने अपनी संपत्ति बेचने की अनुमती दे दी है। यानि कि नकदी संकट और कर्ज में फंसी जेट एयरवेज अब मुंबई के बांद्रा कुलौ काम्‍प्‍लेक्‍स के अपने ऑफिस को बेच सकती है। एयरलाइंस इस बिक्री के जरिये एचडीएफसी का 360 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाएगी। साथ ही विदेश से लिए गए कर्ज और कॉरपोरेट इंसॉल्‍वेंसी रिजॉल्‍यूशन प्रोसेस के खर्च का भुगतान भी करेगी।

26 जून को हो सकती है जेट एयरवेज की संपत्ति की नीलामी

दरअसल जेट एयरवेज के इंसॉल्‍वेंसी रिजॉल्‍यूशन प्रोफेशनल आशीष छवछारिया ने गोदरेज केबीसी बिल्डिंग के तीसरे और चौथे फ्लोर को बेचने की अनुमति मांगी थी, ताकि कर्ज का निपटान किया जा सके। छवछारिया ने एनसीएलटी से कहा था कि इस बिक्री से मिलने वाली पूंजी से एचडीएफसी के अलावा अमेरिका की एक्‍सपोर्ट-इम्‍पोर्ट बैंक का कर्ज भी चुकाया जाएगा। इससे एयरलाइन की वैल्‍यू में इजाफा हो सकेगा। आपको बता दें कि इससे पहले कर्जदाताओं की समिति की 24 अप्रैल को हुई 10वीं बैठक में 74.45 फीसदी वोट के साथ इस बिक्री के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी थी।

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बांद्रा कुर्ला बिल्डिंग में मौजूद संपत्ति का एयरलाइन ने कभी इस्‍तेमाल नहीं है। कर्जदाता एचडीएफसी ने इस संपत्ति का रिजर्व प्राइस 490 करोड़ रुपये रखा है। अब एनसीएलटी द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद 26 जून को इस संपत्ति की नीलामी किये जाने की उम्मीद है। आदेश में कहा गया है कि यूएस एक्जिम बैंक के पास एयरलाइन कंपनी के 6 विमानों के अधिकार हैं। जिनकी कीमत करीब 1,400 करोड़ रुपये है।

जेट एयरवेज पर है करीब 8000 करोड़ का कर्ज

एनसीएलटी ने कहा है कि अगर एयरलाइन ने अमेरिकी बैंक को कर्ज का भुगतान नहीं किया है तो 6 विमानों पर यूएस एक्जिम बैंक का मालिकाना हक हो जाएगा। यूएस एक्जिम बैंक ने सहमति जताई है कि अगर एयरलाइन 90 करोड़ रुपये का भुगतान कर देती है तो सभी विमान कॉरपोरेट कर्जदाता को ट्रांसफर कर देगा। नकदी संकट में फंसी जेट एरवेज ने अप्रैल 2019 में ही अपने सभी विमानों की उड़ानें बंद कर दी थीं।

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एयरलाइन कंपनी पर विभिन्‍न बैंकों और कर्जदाताओं का करीब 8,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इनमें सरकारी बैंकों की बड़ी हिस्‍सेदारी है। एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने 20 जून 2019 को स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्‍व में कर्जदाताओं के कंजोर्टियम की ओर से दायर याचिका को स्‍वीकार करते हुए सुनवाई शुरू कर दी।

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