NEET रिजर्वेशन केस: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, आरक्षण कोई बुनियादी अधिकार नहीं है

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु में NEET पोस्ट ग्रेजुएशन रिजर्वेशन मामले में सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने आरक्षण को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है।

Published by Shreya Published: June 11, 2020 | 1:26 pm

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को तमिलनाडु में NEET पोस्ट ग्रेजुएशन रिजर्वेशन मामले में सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने आरक्षण को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है। दरअसल, अदालत ने कहा कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करने से मना कर दिया है।

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कई राजनीतिक दलों ने दायर की थी ये याचिका

बता दें कि तमिलनाडु में कई राजनीतिक दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में NEET के तहत मेडिकल कॉलेज में सीटों को लेकर 50 फीसदी OBC आरक्षण के मामले पर याचिका दायर की गई थी। इस याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

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इस मामले में किसका मौलिक अधिकार छीना गया है?

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में किसका मौलिक अधिकार छीना गया है। अदालत ने कहा कि आपकी दलीलों से ऐसा लगता है कि आप राज्य के केवल कुछ लोगों की ही भलाई की बात कर रहे हैं। डीएमके ने कोर्ट में कहा कि हम अदालत से ज्यादा आरक्षण जोड़ने के लिए नहीं कह रहे, बल्कि जो है उसे लागू करने के लिए कह रहे है।

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आरक्षण कोई बुनियादी अधिकार नहीं है

इस दौरान जस्टिस राव ने कहा कि आरक्षण कोई बुनियादी अधिकार नहीं है। आप सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ले लें और इसे हाईकोर्ट में दायर करें। हालांकि इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें खुशी है कि एक मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एकजुट हुए हैं। लेकिन हम इस याचिका की सुनवाई नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इसे खारिज नहीं कर रहे। हम आपको हाई कोर्ट में सुनवाई का मौका दे रहे हैं।

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