मुसीबत आ रही: यहां भीषण बाढ़ का खतरा, नेपाल की जिद के कारण होगा ऐसा

बिहार में मॉनसून आ चुका है और लगातार झमाझम बारिश हो रही है। ऐसे में ज्यादातर नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है और उत्तर पूर्वी बिहार पर बाढ़ का भी खतरा मंडराने लगा है।

नई दिल्ली: भारत के राज्य बिहार से सटे पड़ोसी देश नेपाल ने नक्शा विवाद खड़ा करके भारत और नेपाल के रिश्तों में तनाव खड़ा कर दिया है। दोनों देशों के बीच खराब हो रहे संबंध का सबसे ज्यादा नुकसान बिहार को उठाना पड़ सकता है क्योंकि नेपाल ने बांध (डैम) की मरम्मत के काम को रोक दिया है। इस बांध को बांधने का काम रोकने से बिहार को बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।

बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा

गौरतलब है कि बिहार में मॉनसून आ चुका है और लगातार झमाझम बारिश हो रही है। ऐसे में ज्यादातर नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है और उत्तर पूर्वी बिहार पर बाढ़ का भी खतरा मंडराने लगा है। बिहार में बहने वाली ज्यादातर नदियों का उद्गम स्थल नेपाल है। ऐसे में अगर समय रहते इन बांधों का रख-रखाव नहीं किया गया तो बिहार एक बार फिर साल 2008 और 2017 की तरह भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलने पर मजबूर हो सकता है।

बिहार में बहने वाली कोसी और गंडक प्रमुख नदियां

बता दें कि बिहार में बहने वाली कोसी और गंडक प्रमुख नदियां हैं। कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। कई जिलों में जलस्तर बढ़ने के बाद कोसी नदी उफान मारने लगी है। उत्तर पूर्वी बिहार में कोसी नदी मॉनसून में भयंकर रूप धारण कर लेती है।

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गंडक बैराज में मरम्मत के काम को नेपाल ने रोक दिया

दोनों देशों के रिश्ते में तनाव आने के बाद गंडक बैराज में मरम्मत के काम को नेपाल सरकार की तरफ से रोक दिया गया जिससे विवाद पैदा हो गया है। नेपाल बांध के निर्माण स्थल को अब अपनी जमीन बता रहा है। बता दें कि साल 2017 में ललबकेया नदी का पश्चिमी तटबंध टूट गया था जिसने बिहार में भारी तबाही मचाई थी और राज्य के कई शहर जलमग्न हो गए थे।

बिहार सरकार की चिंता बढ़ी

दो देशों के बीच का मामला होने की वजह से बिहार सरकार चिंतित है क्योंकि राज्य में इन दिनों भारी बारिश हो रही है जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। ऐसे में बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की है।

जल संसाधन मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि वाल्मीकि नगर के गंडक बैराज में करीब 36 गेट हैं जिनमें से 18 गेट नेपाल में है। वहां नेपाल ने बैरियर लगा रखा है जिससे मरम्मत का काम प्रभावित हो रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुलाई बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज राजधानी पटना में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई है। बैठक का मुख्य एजेंडा समय रहते विवाद को सुलझा कर जल्द से जल्द बांधों के मरम्मत का काम शुरू करवाना है। बता दें कि बारिश के मौसम में जब इन बांधों में पानी भर जाता है तो नेपाल अपने दरवाजे खोल देता है जिससे उत्तर पूर्वी बिहार का निचला हिस्सा पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ जाता है। नेपाल के सुरक्षाकर्मियों ने भारतीय इंजीनियरों को वहां काम करने से रोक दिया है। चिट्ठी में जयनगर में भी कुछ इसी तरह की दिक्कतों का जिक्र किया गया है।

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नेपाल-बिहार बॉर्डर पर ढाका अनुमंडल में बन रहा था बांध

बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने बताया कि हम लोग पहली बार इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं और मरम्मत के लिए जरूरी सामान भी वहां तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण के DM कपिल अशोक ने एक बातचीत में बताया है कि उन्होंने बिहार सरकार को मामले की पूरी रिपोर्ट दे दी है। पूर्वी चंपारण में नेपाल-बिहार बॉर्डर पर ढाका अनुमंडल में  बिहार की तरफ से बांध बन रहा था। नेपाल ने यह कहर आपत्ति जताई है कि जिस जमीन पर बांध बन रहा है वो इलाका नो मेंस लैंड में है।

डैम का निर्माण प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1964 में करवाया

बता दें कि जिस बांध की मरम्मत को लेकर नेपाल इन दिनों रोक रहा है उसको भारत सरकार ने ही बनवाया था। इस डैम का निर्माण देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1964 में कराया था। पूरा खर्च भारत ने वहन किया था। इससे नेपाल को भी पानी मिलता है, लेकिन डैम के दोनों तरफ सुरक्षा बांध का रख-रखाव बिहार का जल संसाधन विभाग करता आया है।

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