आधार कार्ड से ज्यादा जानकारी मिलेगी एनपीआर में

भारत में इन दिनों नागरिकता का मसला काफी उछला हुआ है। अब देश में जनगणना होनी है और इस क्रम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर या ‘एनपीआर’ का काम शुरू होने वाला..

निलमणी लाल

नई दिल्ली। भारत में इन दिनों नागरिकता का मसला काफी उछला हुआ है। अब देश में जनगणना होनी है और इस क्रम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर या ‘एनपीआर’ का काम शुरू होने वाला है।  ऐसे में ये सवाल भी उठ रहा है कि जब नागरिकों से आधार कार्ड के लिए जानकारियां ली जा चुकी हैं तो एनपीआर में वही जानकारी लेने का क्या औचित्य है। लेकिन समझना जरूरी है कि एनपीआर में आधार से इतर जानकारियां जुटाईं जाएंगी।

क्या है विवाद

आधार कार्ड और एनपीआर को लेकर विवाद भी इन दिनों खूब हुए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि लगभग एक जैसे लक्ष्य के लिए दो अलग-अलग तरह के कार्ड क्यों? इससे श्रम और पैसे की बर्बादी होगी। आम लोगों की निजता को इन कार्ड से खतरा होने का अंदेशा है। एक वर्ग राइट टू प्राइवेसी के तहत दोनों कार्ड में एक की जाने वाली तमाम सूचना का विरोध कर रहा है।

 

आधार

तर्क दिया जा रहा है कि दुनिया के किसी भी देश में इतनी निजी सूचना नहीं ली जा रही है, जितना ऐसे कार्ड को बनाने के दौरान लिया जा रहा है। ये भी भ्रम फैलाया जा रहा है कि एनपीआर का नागरिकता कानून से ताल्लुक है।

दरअसल, गृह मंत्रालय ने खुद माना है कि गलत सूचना के आधार पर कई आधार कार्ड बन रहे हैं। एक संसदीय समिति ने तो आधार के वजूद पर ही सवाल उठाते हुए उसके सारे रेकार्ड नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर को ट्रांसफर कर देने की सिफारिश की थी।

आधार की शुरुआत 28 जनवरी 2009 को हुई थी। इसमें केंद्र सरकार की ओर से हर नागरिक को जारी किया जाने वाला एक आईडेंटिटी कार्ड है जिस पर 12 अंकों का एक यूनिक नंबर लिखा होता है। किसी भी काम, जिसमें पहचान की जरूरत होती है, इस कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

आधार कार्ड बनवाना जरूरी नहीं बल्कि यह वैकल्पिक व्यवस्था है। इस कार्ड से किसी के डेमोग्रैफिक (जनसंख्या संबधी) डिटेल्स मिल सकती है। इसमें भाषा, जाति, धर्म के आधार पर जानकारी नहीं मिलती है। गरीब लोग काम की तलाश में जगह-जगह जाते हैं और उनके पास अपनी पहचान बताने का कोई जरिया नहीं होता।

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आधार कार्ड से वे बैंक में अपना खाता खुलवा सकते है। बिना बिचौलिए के अपना पैसा खुद निकलवा सकते है। रोजगार के लिए खुद को रजिस्टर्ड करवा सकते हैं।

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में देश के हर नागरिक की जानकारी दर्ज होती है। इसमें पंचायत,जिला,राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर इंट्री की जाती है। इसमें रजिस्टर करने के बाद 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को ‘स्मार्ट नेशनल आइडेंटिटी’ दिए जाने का प्रस्ताव है। सिटीजनशिप एक्ट 1955 की धारा 14 ए के तहत नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में नाम दर्ज करना जरूरी है।

वैध नागरिक बनने के लिए इसमें नाम दर्ज करना जरूरी है। यह एक ऐसा डेटा बेस होगा, जिसमें देश में सभी लोगों के बारे में जानकारी होगी। इसी डेटा बेस के आधार पर सरकार को आम लोगों से जुड़ी योजना बनाने में मदद मिलेगी। गलत पहचान के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को भी इससे रोका जा सकेगा।