कंबोडिया के सियाम रीप की तर्ज पर बसेगी ‘नई अयोध्या’, योगी सरकार का खास प्लान

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या में  राम मंदिर का रास्ता साफ होन गया है। यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने  कहा था कि अयोध्या को राम मंदिर निर्माण के साथ ही आध्यात्म और पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाएंगे। अब इस वादे को पूरा करने की तैयारी शुरू हो गई है।

अयोध्या :  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या में  राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया है। यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने  कहा था कि अयोध्या को राम मंदिर निर्माण के साथ ही आध्यात्म और पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाएंगे। अब इस वादे को पूरा करने की तैयारी शुरू हो गई है।

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योगी सरकार ने कंबोडिया के सियाम रीप की तरह अयोध्या में सरयू नदी के किनारे ‘इक्ष्वाकुपुरी’ बसाने का प्रस्ताव तैयार किया है। करीब 2 हजार एकड़ में प्रस्तावित यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ‘नगरी’ राम जन्मभूमि का गेटवे भी होगा।

कंबोडिया के अंकोरवाट में भगवान विष्णु का मंदिर है। यह यूनेस्को की धरोहर और विश्व के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में एक है। सियाम रीप अंकोरवाट के गेटवे के रूप में जाना जाता है। योगी सरकार की योजना राम जन्मभूमि के पहले ऐसे ही एक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक भव्य ‘गेटवे’ सिटी तैयार करने की है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करेगा। इलेक्ट्रिक और बैटरी चालित छोटे वाहनों के ही प्रवेश का प्रस्ताव है।

इक्ष्वाकुपुरी को अयोध्या-गोंडा मार्ग पर गुप्तार घाट के समीप सरयू के किनारे बनाया जाएगा। इसलिए रिवर फ्रंट भी विकसित होगा। खास बात यह है कि प्राकृतिक सौंदर्य और सहजता बनाए रखने के लिए इसे ईको और ग्रीन सीट के रूप में विकसित किया जाएगा।

इक्ष्वाकुपुरी में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का पूरा चित्रण होगा। इसके एंट्री पॉइंट से जन्मभूमि की दूरी करीब ढाई किलोमीटर होगी। खास बात यह है कि नगरी के बीच से रामजन्मभूमि तक 100 मीटर से अधिक चौड़ा पाथवे बनेगा, जो नो वीइकल जोन होगा। इसके किनारे इक्ष्वाकुवंशी राजाओं की भी प्रतिमा लगाई जाएगी, जिसमें उनके पूरे इतिहास की जानकारी होगी।

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अयोध्या में प्रस्तावित भगवान राम की 251 मीटर की भव्य प्रतिमा को भी इक्ष्वाकुपुरी के सेंटर में ही स्थापित किया जाएगा। यह एंट्री पॉइंट से रामजन्मभूमि मार्ग के बीच में स्थापित करने का प्रस्ताव है। इक्ष्वाकुपुरी में वैदिक काल से लेकर महाकाव्य काल के चित्रण और उसके भावभूमि से दर्शकों को परिचित कराने की तैयारी है। इसके लिए ऑडियो-विजुअल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। प्रवेश करते ही वैटिक सेक्टर होगा, जिसमें चारों वेदों ऋगवेद, सामवेद, यजुर्वेद और अर्थववेद के काल क्रम के अनुसार सेक्टर बनाए जाएंगे। इसमें तत्कालीन परंपराओं के अनुसार प्रमुख ऋचाओं का अंकन, उनके भावार्थ, श्रृत परंपरा का भी डिस्प्ले होगा। रामायण और महाभारत दोनों ही महाकाव्यों की अहम घटनाओं व पक्षों को दर्शाती अलग गैलरी होगी।

भगवान राम के जीवन चरित्र के प्रारंभिक प्रसंगों को दिखाने की की तैयारी है। इसमें बाललीला, महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में राम-लक्ष्मण के जाने, शिक्षा ग्रहण, ताड़का वध से लेकर जानकी विवाह तक की घटनाओं को ऐम्फिथिअटर और गैलरी में ऐनिमेशन फिल्मों के जरिए लगातार प्रदर्शित किया जाएगा। सरयू के किनारे पर्यटन की दृष्टि से वॉटर स्पोर्टस की सुविधा भी विकसित की जाएगी।