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भारत में है ताकत: ये 3 दवाइयां कोरोना में कामगर, मांगी अनुमति

कंपनी का कहना है कि कोरोना की 2200 दवाइयों में से सिर्फ तीन दवाइयां काम की हैं। लेकिन इन तीन दवाइयों को ढूँढने का काम इस कंपनी के वैज्ञानिकों किया है।

Aradhya Tripathi

Aradhya TripathiBy Aradhya Tripathi

Published on 17 May 2020 6:22 AM GMT

भारत में है ताकत: ये 3 दवाइयां कोरोना में कामगर, मांगी अनुमति
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पिछले कुछ महीनों से पूरी दुनिया में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है। आए दिन संक्रमित मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। ऐसे में दुनिया के सारे देश इस वायरस की वैक्सीन बनाने में लगे हैं। लेकिन अफ़सोस की अभी तक कोई भी देश इस वायरस का कोई हल नहीं निकाल पाया है। नतीजन ये वायरस उतनी ही तेजी से बढ़ता जा रहा है।

फार्मा रिसर्च कंपनी का दावा 2200 में से 3 दवाइयां काम की

कई डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों के द्वारा हजारों प्रयास और टेस्ट करने के बाद भी अभी तक कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है। न हीं अभी इतनी जल्दी कोई वैक्सीन बनने की उम्मीद है। लेकिन बीच बीच में उम्मीद की किरण नजर आती रहती है। ऐसी ही एक उम्मीद की किरण जगाई पुणे की एक फार्मा रिसर्च कंपनी ने। इस फार्मा रिसर्च कंपनी ने दावा किया था कि उसने 2200 प्रकार की दवाइयों में से 42 दवाइयां ढूंढ निकालीं और फिर इन 42 दवाइयों में से ऐसी तीन दवाइयां खोजी हैं।

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जिनसे कोरोना वायरस का इलाज किया जा सकता है। हालांकि इन तीन दवाइयों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन शामिल नहीं है। इस कंपनी ने एक ऐसी बात का खुलासा किया जो वाकई में हैरान कर देने वाला है। नोवलिड फार्मा कंपनी ने दावा किया कि दुनिया में कोरोना को मारने की दवा पहले से ही मौजूद है, लेकिन वो कौन-सी दवा है ये किसी को भी नहीं पता है। इस कंपनि के ऐसे दावे ने सभी को हैरान कर दिया है।

ह्यूमन ट्रायल की मांगी इजाजत

कंपनी का ये दावा हनुमान जी के संजीवनी बूटी मंगाने पर पूरा पर्वत उठा के लाने जैसा ही है। जहां वैद्य को उस पर्वत में से वो संजीवनी बूटी ढूंढनी थी। यहां भी वैसे ही कंपनी का कहना है कि कोरोना की 2200 दवाइयों में से सिर्फ तीन दवाइयां काम की हैं। लेकिन इन तीन दवाइयों को ढूँढने का काम इस कंपनी के वैज्ञानिकों किया है। नोवलिड फार्मा के मुख्य साइंटिस्ट सुप्रीत देशपांडे ने बताया कि उनकी कंपनी 2008 से गंभीर बीमारियों पर दवाइयां खोजने का काम करती आई है। साइंटिस्ट सुप्रीत देशपांडे ने बताया कि नका काम यह पता लगाना है कि पहले से मान्यता प्राप्त कौन सी दवाई किस बीमारी के इलाज के लिए कारगर है।

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उनकी कंपनी 25 मार्च से कोरोना वायरस के इलाज में कारगर दवाएं ढूंढने में लगी है। जिसके चलते ये पता चला है कि 2200 दवाइयां वायरस को खतम करने में सहायक होती हैं। अब इनमें से कौनसी दवा सबसे सटीक है ये पता लगाना थोड़ा मुश्किल काम है। इसके लिए नोवलिड फार्मा कंपनी के 20 साइंटिस्ट्स ने दिन-रात काम किया. इसके बाद तीन ऐसी दवाइयां पाई गईं, जो कोरोना के इलाज में सबसे ज्यादा कारगर हैं। अब इनका ह्यूमन ट्रायल होना है। इसके लिए कंपनी ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अनुमति मांगी है।

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