राहुल गांधी से बोले रघुराम राजन- भारत के लिए कोरोना एक बड़ा अवसर

राहुल गांधी ने आज रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के साथ संवाद सीरीज के तहत कोरोना पर चर्चा करते हुए कई सवाल पूछे।

नई दिल्ली: कोरोना वायरस को लेकर कांग्रेस ने एक नई मुहीम का आगाज किया है, जिसकी शुरुआत आज पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने की। इस मुहीम के तहत विश्व के प्रमुख विचारकों से बातचीत की जायेगी। इसी कड़ी में राहुल गांधी ने आज रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के साथ संवाद सीरीज के तहत कोरोना पर चर्चा की।

राहुल और रघुराम राजन के बीच चर्चा:

राहुल का सवाल: वायरस के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर काफी चिंता है। इन सब चुनौतियों से किस तरह निपटना है, इसको लेकर क्या राय है?

रघुराम राजन का जवाब: कोरोना को हराने के साथ-साथ हमें आम लोगों के रोजगार के बारे में सोचना होगा, इसके लिए वर्कप्लेस को सुरक्षित करना जरूरी है।

राहुल का सवाल- लॉकडाउन के बीच अर्थव्यवस्था को कैसे खोला जाए?

रघुराम राजन का जवाब: दूसरे लॉकडाउन को लागू करने का मतलब है कि आप खोलने को लेकर कोई सही तैयारी नहीं कर पाए। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या लॉकडाउन 3 भी आएगा। अगर हम सोचें कि शून्य केस पर ही खोला जाएगा, तो वह असंभव है।

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राहुल का सवाल- देश में टेस्टिंग को लेकर कई तरह के सवाल हैं, दूसरे देशों के मुकाबले यहां पर काफी कम टेस्टिंग हो रही है।

रघुराम राजन का जवाब: अगर हम अर्थव्यवस्था को खोलना चाहते हैं, तो टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाना होगा। हमें मास टेस्टिंग की ओर जाना होगा, जिसमें कोई भी 1000 सैंपल लेने होंगे और टेस्ट करना होगा। अमेरिका आज लाखों टेस्ट रोज कर रहा है, लेकिन हम 20 हजार या 30 हजार के बीच ही हैं।

राहुल का सवाल- इस स्थिति से क्या भारत को लाभ हो सकता है, जब कोरोना वायरस का संकट खत्म होगा तो भारत को क्या करना चाहिए?

रघुराम राजन का जवाब: इस तरह की घटनाएं काफी कम ही किसी पर अच्छा प्रभाव डालती हैं, लेकिन भारत के लिए ये मौका कि वह अपनी इंडस्ट्री को दुनिया तक पहुंचाए और लोगों से संवाद कर करे।

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राहुल का सवाल- क्या कोविड के बाद इसका भारत के लिए कोई सकारात्मक असर होगा?

रघुराम राजन का जवाब: हमारे पर संभावनाएं हैं और उसके लिए तैयारी करनी होगी।

राहुल का सवाल-गरीबों की मदद के लिए कितना पैसा लगेगा?

रघुराम राजन का जवाब: तकरीबन 65,000 करोड़ रुपए। इतनी बड़ी इकॉनमी है हमारी हम कर सकते हैं।

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