Top

आज होने जा रहा राज्यसभा उपसभापति का चुनाव, जानिए इसके बारें में सबकुछ

सांसदों का लिए सोमवार का दिन बेहद खास है। क्योंकि आज संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव होने जा रहा है। इस बार संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष में काटें की टक्कर दिखाई दे रही है।

Newstrack

NewstrackBy Newstrack

Published on 14 Sep 2020 9:28 AM GMT

आज होने जा रहा राज्यसभा उपसभापति का चुनाव, जानिए इसके बारें में सबकुछ
X
बता दें कि उपसभापति का पद इस्तीफा, पद से हटाए जाने या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है।
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

नई दिल्ली: सांसदों का लिए सोमवार का दिन बेहद खास है। क्योंकि आज संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव होने जा रहा है। इस बार संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष में काटें की टक्कर दिखाई दे रही है।

जहां एनडीए की तरफ से जेडीयू के हरिवंश नारायण एक बार फिर उम्मीदवार बनाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने आरजेडी के सांसद मनोज झा को मैदान में उतारा हैं। खास बाते ये है कि ये दोनों ही नेता बिहार से ताल्लुक रखते हैं।

Parliament संसद भवन की फोटो(सोशल मीडिया)

ये भी पढ़ेंः हरदोई के नये SP बने अनुराग वत्स: संभाला अपना चार्ज, बोले- जल्द सुधरेंगे हालात

कौन –कौन दल हैं मनोज झा समर्थन में

यहां आपको बता दें कि आरजेडी के मनोज झा पहले से इस बात की उम्मीद लगा चुके हैं कि उन्हें उपसभापति पद के चुनाव में एक दर्जन से अधिक दलों का सपोर्ट हासिल है। जिसमें कांग्रेस की तरफ से 40, डीएमके 7, वामपंथी दल 6, आरजेडी 5, एनसीपी 4, शिवसेना 3, मुस्लिम लीग 1, जेडीएस 1, जेएमएम 1, केरल कांग्रेस 1 और टीडीपी के 1 राज्यसभा सदस्य का सपोर्ट भी सम्मिलित हैं।

यही नहीं टीएमसी 13, समाजवादी पार्टी 8, पीडीपी 2 ,नेशनल कॉन्फ्रेंस 1 भी उनके पक्ष में खड़ी नजर आ रही है।

सियासी जानकारों की मानें तो मनोज झा उन सभी दलों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटे हैं , जो एनडीए के गठबंधन का हिस्सा नहीं है, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर वे इसके सपोर्ट में हर समय खड़े नजर आते हैं।

ये दल हैं बीजेडी, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस। झा बसपा के 4 और आम आदमी पार्टी के 3 सांसदों को भी अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

ये भी पढ़ेंः UP Police में बड़ा बदलाव: योगी सरकार ने लिया फैसला, स्वतंत्र हुई पुलिस

कौन –कौन दल हैं हरिवंश के सपोर्ट में

इसी तरह अगर हम बात करें हरिवंश के समर्थन में खड़ी पार्टियों की तो सबसे पहले हमें भाजपा और एनडीए के सदस्यों की संख्या पर नजर डालनी होगी।

राज्यसभा में भाजपा के पास 87 सदस्य हैं, वहीं एनडीए के सदस्यों की संख्या 116 है। जिसमें भाजपा 87, एआईडीएमके 9, जेडीयू 5, अकाली दल 3, एजेपी 1, बीपीएफ 1, आरपीआई 1, एनपीएफ 1, एमएनएफ 1, एनपीपी के 1 और नामित सदस्य 7 को मिलाकर कुल 116 सदस्यों का समर्थन हरिवंश को प्राप्त है।

अगर हम जीत की बात करे तो राज्यसभा के 245 सदस्यों के सदन में जीत के लिए हरिवंश नारायण को कल 123 मतों की आवश्यकता है। ऐसे में वह टीआरएस 7, वाईएसआर 6 और बीजेडी के 9 सदस्यों का सपोर्ट चाहेंगे।

Indian Parliament संसद भवन के अंदर सदन की कार्यवाही की फोटो (सोशल मीडिया)

कैसे होता है उपसभापति का चुनाव

गौरतलब है कि राज्यसभा का उपसभापति एक संवैधानिक पद है। हमारे देश के संविधान के अनुच्छेद 89 में कहा गया है कि राज्यसभा अपने एक सांसद को उपसभापति पद के लिए चुन सकता है, जब यह पद खाली हो।

बता दें कि उपसभापति का पद इस्तीफा, पद से हटाए जाने या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है।

क्या है राज्यसभा के उपसभापति चुनने का नियम

अगर सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो इस स्थिति में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाता है।

यहां ये भी जानना जरूरी है कि कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है। उसे किसी दूसरे सांसद का समर्थन भी जरूरी है।

इतना ही नहीं प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है जिनका नाम वह प्रस्तावित कर रहा है। इसमें इस बात का जिक्र साफ़ –साफ होता है कि निवार्चित होने पर वह उपसभापति के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हैं।

प्रत्येक सांसद को केवल एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाने या उसके समर्थन की परमिशन प्राप्त होती है। यदि किसी प्रस्ताव में एक से ज्यादा सांसद का नाम हैं तो इस स्थिति में सदन का बहुमत तय करेगा कि कौन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना जाएगा।

सदन में उपसभापति की भूमिका

मालूम हो कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जो भी सदन की अध्यक्षता करता है, उसका काम नियमों के हिसाब से सदन को चलाना होता है। किसी भी बिल को पास कराने के लिए वोटिंग हो रही है तो उसकी देखरेख भी ये ही करते हैं। ये किसी भी राजनीतिक पार्टी का पक्ष नहीं ले सकते हैं।

सदन में हंगामा होने या किसी भी वजह से सदन को स्थगित करने का अधिकार अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को ही होता है। किसी सदस्य के इस्तीफा को मंजूर या नामंजूर करने का अधिकार अध्यक्ष का उपाध्यक्ष को ही होता है।

भारत में संसद के दो सदन होते हैं, एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा। लोकसभा के सदस्यों को पब्लिक चुन कर भेजती है जबकि राज्यसभा के सदस्यों को राज्यों के चुने गए विधायक निर्वाचित करते हैं।

ये भी पढ़ेंः सावधान यूपी पुलिस: अब चलेगी योगी सरकार की तलवार, सीधे होगी छुट्टी

दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।

Newstrack

Newstrack

Next Story