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इस मुस्लिम देश में मिले भगवान राम और हनुमान के निशान!

भारतीय प्रतिनिधिमंडल को मुस्लिम देश इराक में दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस बारे में अयोध्या शोध संस्थान ने दावा किया है कि यह भगवान राम की एक छवि है। यह भित्तिचित्र दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में बना मिला है।

Dharmendra kumar

By Dharmendra kumar

Published on 26 Jun 2019 12:09 PM GMT

इस मुस्लिम देश में मिले भगवान राम और हनुमान के निशान!
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लखनऊ: भारतीय प्रतिनिधिमंडल को मुस्लिम देश इराक में दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस बारे में अयोध्या शोध संस्थान ने दावा किया है कि यह भगवान राम की एक छवि है। यह भित्तिचित्र दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में बना मिला है।

यह इलाका इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में एक संकरे मार्ग से गुजरता है। इसमें एक नंगी छाती वाले राजा को दिखाया गया है, जो धनुष पर तीर ताने हैं, एक तरकश और उसकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है।

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इसके बारे में अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि यह हनुमान की छवि है। इराकी विद्वानों का कहना है कि यह भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी को दर्शाती है।

भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। इसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था। एब्रिल वाणिज्य दूतावास में एक भारतीय राजनयिक, चंद्रमौली कर्ण, सुलेमानिया विश्वविद्यालय के इतिहासकार और कुर्दिस्तान के इराकी गवर्नर भी इस अभियान में शामिल हुए।

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अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि बेलुला दर्रे में भगवान राम के ये निशान प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राम सिर्फ कहानियों में नहीं हैं। इस प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए चित्रमय प्रमाण एकत्र किया है।

योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि चित्र में बने राजा और बंदर, राम और हनुमान हैं। हालांकि इराक में पुरातत्वविद और इतिहासकार इसे भगवान राम से नहीं जोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि इसे साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजने की जरूरत है। हमने शोध के लिए इराक सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद कड़ियों को जोड़ने पर काम होगा।

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सिंह ने दावा किया कि सिंधु घाटी और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के बीच संबंध स्थापित करने का यह पहला आधिकारिक प्रयास था। विभिन्न संदर्भों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दावा किया गया था कि लोअर मेसोपोटामिया पर 4500 और 1900 ईसा पूर्व के बीच सुमेरियों का शासन था। साक्ष्य हैं कि वे भारत से आए थे और आनुवांशिक रूप से सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े थे।

यूपी के संस्कृति विभाग ने अयोध्या में बनाए गए उसी भित्तिचित्र की प्रतिकृति प्राप्त करने के लिए एक प्रस्ताव भी तैयार किया है। संस्थान के निदेशक ने बताया कि राम के निशान दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध हैं। प्रस्ताव है कि अयोध्या में एक ही छत के नीचे विभिन्न स्थानों के भित्तिचित्र लाकर रखे जाएं।

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