सीएए पर गरजे RSS प्रमुख: काशी-मथुरा पर कही ये बड़ी बात

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को जिज्ञासा और समाधान सत्र में स्वयंसेवकों के सवालों का बेबाकी..

Published by Deepak Raj Published: January 17, 2020 | 2:15 pm
Modified: January 17, 2020 | 2:17 pm

मुरादाबाद।  उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को जिज्ञासा और समाधान सत्र में स्वयंसेवकों के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।

इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के बनते ही संघ अपने आपको इससे अलग कर लेगा। साथ ही संघ प्रमुख ने कहा कि काशी और मथुरा RSS के एजेंडे में नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) देशहित में है, इससे पीछे हटने की जरूरत नहीं है।

एमआइटी के शाखा में शामिल हुए संघ प्रमुख

संघ प्रमुख गुरुवार की सुबह कार्यक्रम स्थल मुरादाबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) में लगी शाखा में शामिल हुए। इसके बाद शाम को चार बजे से साढ़े पांच बजे तक जिज्ञासा और समाधान सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे।

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इस कार्यक्रम में आरएसएस के क्षेत्रीय कार्यकारिणी के चुनिंदा 40 पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान स्वयंसेवकों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से देश की मौजूदा स्थिति पर सवाल पूछा और उन्होंने सभी सवालों का पूरी सादगी से जवाब दिया।

काशी और मथुरा पर संघ ने किया इनकार

संघ के जिज्ञासा और समाधान सत्र में एक स्वयंसेवक ने पूछा कि क्या अयोध्या के बाद अब संघ काशी और मथुरा का मुद्दा उठाएगा तो संघ प्रमुख ने साफ तौर पर इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि फिलहाल संघ के एजेंडे में काशी और मथुरा मुद्दा नहीं है।साथ ही राम मंदिर पर कहा कि संघ की भूमिका इस प्रकरण में सिर्फ ट्रस्ट निर्माण होने तक है। इसके बाद संघ खुद को इससे अलग कर लेगा।

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सीएए पर पिछे हटने की जरूरत नही

सूत्रों की मानें तो नागरिकता संशोधन कानून पर पूछे गए सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि स्वयंसेवकों को उत्तर दिया कि सीएए पर पीछे हटने की कोई जरूरत नहीं है और न ही विरोध से चिंतित होने की जरूरत है क्योंकि सभी जानते हैं कि यह कानून देशहित में है।

संघ प्रमुख ने कहा कि सीएए को लेकर देश में कुछ लोग भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस भ्रम को दूर किया जाए। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील करते हुए कहा कि सेमिनार, गोष्ठी और बैठकों के जरिए नागरिकता संशोधन कानून पर लोगों के भ्रम दूर करें।