मौलाना साद आखिर कहां? तबलीगी जमात का है मुखिया, पुलिस ढूढ़ रही सुराग

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात में हुआ कोरोना वायरस विस्फोट पूरे देश में तबाही मचाने को तैयार है। ऐसे में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ मामला दर्ज हो गया और उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन पुलिस को अब तक मौलाना साद का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

नई दिल्ली: दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात में हुआ कोरोना वायरस विस्फोट पूरे देश में तबाही मचाने को तैयार है। ऐसे में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ मामला दर्ज हो गया और उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन पुलिस को अब तक मौलाना साद का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद की तलाश में क्राइम ब्रांच

तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद की तलाश में देश के कई क्षेत्रों में पुलिस छापेमारी कर रही है। साद के अलावा पुलिस उसके अन्य 6 साथियों की भी तलाश में हैं। दिल्ली के निजामुदीन थाने में इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और जल्द से जल्द इनकी गिरफ्तारी की मांग की जा रही है।

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क्या है मामला

दरअसल, कोरोना वायरस को बढ़ने से रोकने के लिए जहां जनता कर्फ्यू, लॉकडाउन लगाया जा रहा है। वहीं 13 मार्च को दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में जमात का काम सरकार की चेतावनी के बाद भी जारी रखा गया। मौलाना साद ने मरकज में जोड़ का एक कार्यक्रम रखा था, जिसमें शामिल होने के लिए न केवल भारत नहीं बल्कि विदेशों से भी काफी लोग आए। आयोजन में शामिल होने के लिए लॉकडाउन के बाद भी तबलीगी जमात के मरकज में हजारों की संख्या में लोग शामिल थे।

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कई जमाती कोरोना पॉजिटिव :

बाद में यहां शामिल सैकड़ों लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इस खबर से हड़कंप मच गया। कोरोना संक्रमितों के मामले नाटकीय ढंग से और अधिक बढ़ गए। तबलीगी जमात के मरकज पर देश के अलग- अलग राज्यों में गए थे। सभी प्रदशों की सरकार और पुलिस एक्टीव हो गयी और इन जमातियों की तलाश में जुट गयी।

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दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, असम, मेघालय, अंडमान समेत तमाम राज्य सरकारों ने जलसे में शामिल 5 हजार जमातियों को ढूंढ निकाला है।

कौन है मौलाना साद

इस पूरे घटनाक्रम में मौलाना साद की बड़ी लापरवाही सामने आयी। मौलाना साद तबलीगी जमात के मुखिया (अमीर) हैं। ये पहला मौका नहीं है, जब मौलाना साद और तबलीगी जमात विवादों में आई हो। इससे पहले भी जमात सुर्खियों में घिर चुका है। तीन साल पहले जमात में ऐसा विवाद हुआ था कि उसने उसे दो गुटों में बांट दिया था। इसके बाद ही मौलाना साद ने खुद को पुरानी तबलीगी जमात का अमीर यानि मुखिया करार दे दिया था।

इलियास की चौथी पीढ़ी के हैं मौलाना साद

मौलाना साद, मौलाना इलियास कांधलवी के परपोते हैं, जो कि उनकी चौथी पीढ़ी से हैं। इसके अलावा मौलाना इलियास के बेटे और मौलाना साद के दादा मौलाना युसुफ थे, जो मौलाना इलियास के निधन के बाद अमीर (मुखिया) बने थे।

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मौलाना साद के बारे में बात की जाए तो उनका जन्म 1965 में हुआ था। इनके पिता का नाम मौलाना मोहम्मद हारून था। मौलाना साद की शुरुआती पढ़ाई 1987 में मदरसा कशफुल उलूम, हजरत निजामुद्दीन में हुई। इसके बाद वो सहारनपुर चले गये, जहां पर उन्होंने आलमियत की डिग्री प्राप्त की।

दिल्ली में ही छिपा है मौलाना साद:

दिल्ली पुलिस ने तबलीगी जमात के मौलाना साद और अन्य के खिलाफ महामारी कानून 1897 के तहत मुकदमा दर्ज कर किया है। क्राइम ब्रांच की टीम साद को ढूढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, साद दिल्ली में ही छुपा बैठा है। दिल्ली में उसके दो घर हैं। एक हजरत निजामुद्दीन बस्ती और दूसरा जाकिर नगर में।

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सभी जमातियों को लिया गया क्वारंटीन

अब तक देश राज्यों से मिले करीब ५ हजार जमातियों को क्वारंटीन कर दिया गया है। हालांकि अभी भी कइयों की तलाश जारी है।

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