अब इस सुरंग को अटल के नाम से जाना जाएगा, जानिए कहां पर है स्थित

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर रोहतांग दर्रे के नीचे से गुजरने वाली सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्माणाधीन सुरंग का नाम आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने की मंजूरी दे दी।

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर रोहतांग दर्रे के नीचे से गुजरने वाली सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्माणाधीन सुरंग का नाम आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने की मंजूरी दे दी। सुरंग को नया नाम 25 दिसंबर 2019 को श्री वाजपेयी की जंयती के अवसर पर दिया जाएगा।

हिमाचल की ओर से इस सुरंग का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने की मांग काफी समय से की जा रही थी। क्योंकि इस सुरंग की परिकल्पना अटल बिहारी वाजपेयी ने 1997 में की थी। यह निर्णय अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को देखते हुए लिया गया है।

रोहतांग दर्रे के नीचे रणनीतिक महत्‍व की सुरंग बनाए जाने का ऐतिहासिक फैसला 3 जून 2000 को लिया गया था जब श्री वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। सुंरग के दक्षिणी हिस्‍से को जोड़ने वाली सड़क की आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गई थी।

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8.8 किलोमीटर लंबी यह सुरंग 3000 मीटर की ऊंचाई पर बनायी गयी दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है। इससे सड़क मार्ग से मनाली से लेह की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। साथ ही इससे परिवहन का खर्च भी कई करोड़ रूपए कम हो जाएगा। यह 10.5 मीटर चौडी दो लेन वाली सुरंग है। इसमें आग से सुरक्षा के सभी उपाय मौजूद हैं साथ ही आपात निकासी के लिए सुरंग के साथ ही बगल में एक और सुरंग बनायी गयी है।

इसके निर्माण के दौरान सीमा सड़क संगठन को कई तरक की भौगोलिक और मौसब संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खासतौर से सेरी नाला फॉल्‍ट जोन के 587 मीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य काफी जटिल और मुश्किल भरा रहा। आखिरकार 15 अक्‍टूबर 2017 को सुरंग के दोनों छोर तक सड़क निर्माण पूरा कर लिया गया।

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सुरंग का निर्माण जल्‍दी ही पूरा होने वाला है। इससे हिमाचल प्रदेश के सुदुर सीमावर्ती क्षेत्रों और लद्दाख के बीच सभी तरह के मौसम में सड़क यातायात सुगम हो जाएगा। इससे पहले ठंड के मौसम में इन क्षेत्रों का संपर्क देश के अन्‍य हिस्‍सों से छह महीने तक पूरी तरह खत्‍म हो जाता था।

हिमाचल प्रदेश के टॉप टूरिस्ट डेस्टिनेशन में रोहतांग को भी गिना जाता है। जून के महीने में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते है। दिसंबर में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के बाद इसे बंद कर दिया जाता है और जून में इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है।

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रोहतांग दर्रा पीर पंजाल शृंखला पर बना एक पहाड़ी रास्ता है जो मनाली से करीब 51 किलोमीटर दूर है। यह रास्ता कुल्लू घाटी को लाहौल स्पिति से जोड़ता है। इस रास्ते पर पहली बार इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत की गई है। यह रास्ता केवल मई से नवंबर के बीच ही खुलता है। बाकी समय इस रास्ते को बर्फ जमने के कारण बंद करना पड़ता है। यह रास्ता अचानक आने वाले बर्फानी तूफान के कारण खतरनाक माना जाता है। पुराने समय में इस रास्ते को व्यापार के लिए इस्तेमाल किया जाता था।