पाक में भिड़ने की हिम्मत नहीं! हथियार आयात में भारत से कोसों दूर है पाकिस्तान

रिपोर्ट के मुताबिक हथियार संबंधी भारत की 65 प्रतिशत जरूरतें आयात के जरिये ही पूरी होती हैं। रक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़ी भारतीय कंपनियां अभी भी सशस्त्र सेनाओं की जरूरतें पूरी कर पाने में सक्षम नहीं हो पाई हैं|

नई दिल्ली: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, भारत 2014-18 में प्रमुख हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है और वैश्विक स्तर पर यह 9.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2018 के बीच भारत के हथियार आयात में 24 फीसदी की भारी-भरकम वृद्धि भी हुई है। साथ ही, इस दौरान दुनिया के तमाम देशों की तरफ से आयात किए हथियारों में अकेले भारत की हिस्सेदारी 9.5 प्रतिशत रही है।

बात यदि भारत की करें तो सार्वजनिक क्षेत्र की तीन शीर्ष रक्षा कंपनियों की सामूहिक बिक्री 2018 में 6.9 प्रतिशत घटकर 5.9 अरब अमेरिकी डॉलर रह गई। हालांकि इस दौरान वैश्विक स्तर पर हथियारों की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। भारत की रक्षा क्षेत्र की तीनों कंपनियां दुनिया की शीर्ष 100 हथियार आपूर्तिकर्ताओं में आती हैं।

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2014-18 में सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदे

रिपोर्ट के मुताबिक बड़े हथियार आयातकों में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, आस्ट्रेलिया, अल्जीरिया, इराक, पाकिस्तान और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। जहां तक भारत की बात है तो 2014-18 के दौरान इसने सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदे।

एसआईपीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हथियारों के लिहाज से बीते काफी समय से भारत की निर्भरता रूस और इजरायल पर रही है। इधर बीते कुछ वर्षों में हिंद महासागर और एशिया में चीन के बढ़ते दखल के मद्देनजर अमेरिका ने भारत के साथ नजदीकी बढ़ाई है।

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इस रिपोर्ट में हथियारों के निर्यातक देशों का जिक्र भी किया गया है। इसके मुताबिक अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी के बाद हथियार निर्यात करने वालों में चीन पांचवां सबसे बड़ा देश है। चीन का सबसे बड़ा ग्राहक उसी का पड़ोसी पाकिस्तान है। वह उसे 35 प्रतिशत हथियार निर्यात करता है। इसके बाद बांग्लादेश की बारी आती है जिसे वह 19 प्रतिशत हथियार निर्यात करता है।

भारतीय कंपनियों का योगदान सबसे कम

शीर्ष 100 में शामिल तीन भारतीय हथियार कंपनियों की संयुक्त हथियार बिक्री 2018 में 5.9 अरब थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 से 6.9 प्रतिशत की कमी आई है। यह कमी मुख्य रूप से भारतीय आयुध निर्माण की हथियारों की बिक्री में 27 प्रतिशत की गिरावट के कारण आई है। एसआईपीआरआई की शीर्ष 100 वैश्विक हथियार फर्मों की सूची में तीन भारतीय कंपनियां हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) 38वें स्थान पर है, भारतीय आयुध कारखानों 56वें स्थान पर और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 62वें स्थान पर है। शीर्ष 100 कंपनियों की हथियारों की बिक्री का 1.4 प्रतिशत में इन कंपनियों की हिस्सेदारी है।

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रिपोर्ट के मुताबिक हथियार संबंधी भारत की 65 प्रतिशत जरूरतें आयात के जरिये ही पूरी होती हैं। रक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़ी भारतीय कंपनियां अभी भी सशस्त्र सेनाओं की जरूरतें पूरी कर पाने में सक्षम नहीं हो पाई हैं|

2018 में 100 शीर्ष हथियार निर्माताओं में शामिल कंपनियां

2018 में 100 शीर्ष हथियार निर्माताओं में से अमेरिका, यूरोप और रूस की आठ कंपनियां शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेष 20 में से जापान की छह, इस्राइल, भारत और दक्षिण कोरिया की तीन। तुर्की की दो और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर की एक-एक कंपनियां शामिल हैं। एसआईपीआरआई के आर्म्स इंडस्ट्री डेटाबेस के नए आंकड़े से पता चलता है कि 2002 के बाद से शीर्ष 100 में सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा हथियारों और सैन्य सेवाओं बिक्री में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।