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राज्‍यसभा में UAPA बिल पास, अब आतंकवाद से सख्‍ती से निपटेगा भारत

राज्यसभा ने शुक्रवार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने तथा आतंकवाद की जांच के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को और अधिकार देने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कर दिया।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 2 Aug 2019 9:41 AM GMT

राज्‍यसभा में UAPA बिल पास, अब आतंकवाद से सख्‍ती से निपटेगा भारत
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नई दिल्ली: राज्यसभा ने शुक्रवार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने तथा आतंकवाद की जांच के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को और अधिकार देने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कर दिया।

सरकार ने इसके प्रावधानों के दुरूपयोग की विपक्ष की आशंकाओं को निराधार करार देते हुए कहा कि इसके प्रावधान जांच एजेंसियों को आतंकवाद से ‘चार कदम आगे रखने के लिए हैं।’ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के पक्ष में 147 और विरोध में 42 वोट पड़े।

वहीं, सदन ने विपक्ष के इसे सेलेक्ट कमिटी में भेजने के प्रस्ताव को 84 के मुकाबले 104 मतों से खारिज कर दिया। आपको बता दें कि लोकसभा में यह बिल पिछले महीने ही पारित हो गया था।

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शाह ने कही ये बात

विधेयक में व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के प्रावधान के दुरूपयोग होने की आशंका को निर्मूल ठहराते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए ऐसा करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कानून में यदि इस तरह का प्रावधान 2009 में रहा होता तो कोलकाता पुलिस द्वारा पकड़ा गया कुख्यात आतंकवाद यासीन भटकल कभी नहीं छूट पाता और आज एनआईए की गिरफ्त में होता।

31 जुलाई 2019 तक 278 मामले दर्ज

अमित शाह ने सदन में कहा कि कई देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। कानून के दुरुपयोग की दलील ठीक नहीं है। 31 जुलाई 2019 तक एनआईए ने कुल 278 मामले कानून के अंतर्गत रजिस्टर किए।

204 मामलों में आरोप पत्र दायर किए गए और 54 मामलों में अब तक फैसला आया है। 54 में से 48 मामलों में सजा हुई है। सजा की दर 91 प्रतिशत है। दुनियाभर की सभी एजेंसियों में एनआईए की सजा की दर सबसे ज्यादा है।

शाह ने कहा, 'जेहादी किस्म के केसों में 109 मामले रजिस्टर्ड किए गए। वामपंथी उग्रवाद के 27 मामले रजिस्टर्ड किए गए। नार्थ ईस्ट में अलग-अलग हत्यारे ग्रुपों के खिलाफ 47 मामले रजिस्टर्ड किए गए। खालिस्तानवादी ग्रुपों पर 14 मामले रजिस्टर्ड किए गए।

जब हम किसी आतंकी गतिविधियों में लिप्त संस्था पर प्रतिबंध लगाते हैं तो उससे जुड़े लोग दूसरी संस्था खोल देते हैं और अपनी विचारधारा फैलाते रहते हैं। जब तक ऐसे लोगों को आतंकवादी नहीं घोषित करते तब तक इनके काम पर और इनके इरादे पर रोक नहीं लगाई जा सकती।'

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कांग्रेस के इन नेताओं ने बोला हमला

इससे पहले पी चिदंबरम ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा, यदि आप संशोधन के कारणों को देखते हैं तो वह एनआईए को सशक्त बनाने का है। इस विधेयक को पास करते समय आपने कहा था कि केंद्र के पास आतंकवादी के रूप में किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार है।

हम इसका संशोधन का विरोध कर रहे हैं। हम गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम का विरोध नहीं कर रहे हैं।दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में यूएपीए बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, 'हमें भाजपा के इरादों पर शक है। कांग्रेस ने आतंकवाद पर कभी समझौता नहीं किया, यही वजह है कि हम यह कानून लाए थे। आपने आतंकवाद पर समझौता किया, एक बार रुबैया सईद जी की रिहाई के दौरान और दूसरा मसूद अजहर को छोड़ कर।'

शाह ने दिग्विजय को लेकर कही ये बात

उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा के दुरुपयोग और हवाला के लिए 45 मामले दर्ज किए गए और अन्य 36 मामले दर्ज किए गए। सभी मामलों में कोर्ट के अंदर चार्जशीट की प्रक्रिया कानून के तहत हुई है। शाह ने समझौता एक्सप्रेस बम धमाके का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें जांच एजेंसी को कोई सबूत नहीं मिले।

दिग्विजय का गुस्सा जायज है वह चुनाव हारे हैं। वो कह रहे हैं कि मुझे ही आतंकी घोषित कर दो। मैं उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि आप कुछ नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा।

उनका कहना है कि एनआईए के तीन मामलों में किसी को सजा नहीं हुई है। इस धमाके में नकली आरोपी पकड़े गए थे। समझौता मामले में जजों को कुछ नहीं मिला। कांग्रेस की नजर और नजारा बदल गया है। आंतकवाद इंसान नहीं इंसानियत के खिलाफ है। कांगेस ने आतंकवाद को धर्म से जोड़ा है।

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