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उन्नाव रेप पीड़िता पर KGMU का बड़ा खुलासा, खून में खतरनाक बैक्टीरिया

पीड़िता को एयर एंबुलेंस की मदद से लखनऊ से दिल्ली लाया गया था। इसके बाद इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 से उसे एम्स अस्पताल पहुंचाया गया। इस दौरान पीड़िता को अस्पताल पहुंचाने के लिए दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस ने करीब 13 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बना रखा था।

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 8 Aug 2019 6:27 AM GMT

उन्नाव रेप पीड़िता पर KGMU का बड़ा खुलासा, खून में खतरनाक बैक्टीरिया
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KGMU की रिपोर्ट का खुलासा, उन्नाव रेप पीड़िता के खून से मिले खतरनाक बैक्टीरिया
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नई दिल्ली: उन्नाव रेप पीड़िता का इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा है। यहां भी पीड़िता की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) अस्पताल से पीड़िता की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि पीड़िता को जबरदस्त इंफेक्शन हुआ है। रिपोर्ट में लिखा है कि पीड़िता के खून में जो खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया है।

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बता दें, जब पीड़िता लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) अस्पताल में भर्ती थी, तब जांच के लिए उसके खून का नमूना लिया गया था। इस रिपोर्ट में खून में खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया है। यह बात काफी गंभीर है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बैक्टिरिया पर सात प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं में से छह बेअसर पाई गई हैं। अब ये रिपोर्ट एम्स भेजी जा रही हैं।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी ने दिया बयान

इस मामले में केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि मरीजों को दी गई प्रमुख एंटीबायोटिक के प्रभाव की टेस्टिंग की गई, जिसमें पाया गया कि सात एंटीबायोटिक दवाओं में छह एंटीबायोटिक बेअसर पायी गईं। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा इसे मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस करार दिया गया है। इस बैक्टीरिया को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह काफी रेयर है और यह मल में पाया जाता है।

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अब डॉक्टर इस बात को खोजेंगे कि पीड़िता के शरीर में यह बैक्टीरिया कैसा पाया गया। साथ ही, इसका भी पता लगाया जाएगा कि यह खून तक पहुंचता कैसे है। बता दें, इस बैक्टीरिया की वजह से दवाएं बेअसर हो जाती हैं।

एयर एंबुलेंस की मदद से दिल्ली पहुंची पीड़िता

आपको बता दें कि पीड़िता को एयर एंबुलेंस की मदद से लखनऊ से दिल्ली लाया गया था। इसके बाद इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 से उसे एम्स अस्पताल पहुंचाया गया। इस दौरान पीड़िता को अस्पताल पहुंचाने के लिए दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस ने करीब 13 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बना रखा था। जिसकी मदद से पीड़िता को महज 17 मिनट के अंदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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