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यहां प्रत्याशी तय नहीं कर पा रहे कब मिलें 1 करोड़ 5 लाख वोटर्स से ?

देश भर में लोकसभा चुनाव का माहौल अपने चरम पर है। नेता जीत के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। प्रचार जोर शोर से चल रहा है। लेकिन मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ लोकसभा सीट के प्रत्याशियों को समझ में नहीं आ रहा है कि वो कैसे 1 करोड़ 5 लाख वोटर्स तक अपनी बात पहुंचाए।

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RishiBy Rishi

Published on 21 April 2019 12:29 PM GMT

यहां प्रत्याशी तय नहीं कर पा रहे कब मिलें 1 करोड़ 5 लाख वोटर्स से ?
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लखनऊ : देश भर में लोकसभा चुनाव का माहौल अपने चरम पर है। नेता जीत के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। प्रचार जोर शोर से चल रहा है। लेकिन मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ लोकसभा सीट के प्रत्याशियों को समझ में नहीं आ रहा है कि वो कैसे 1 करोड़ 5 लाख वोटर्स तक अपनी बात पहुंचाए। आपको भी समझ नहीं आया होगा ये गुणा गणित। हम बताते हैं कि आखिर माजरा क्या है।

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आपको बता दें, मुंबई की दो-तिहाई जनसंख्या में रोज ऑफिस जाने वाले, श्रमिक और स्टूडेंट शामिल हैं। इनमें भी लगभग 85 लाख जनसँख्या रोज लोकल ट्रेनों में सफर करती है। जबकि बेस्ट और राज्य बसों, टैक्सी, ऑटो और निजी वाहनों से यात्रा करने वालों की संख्या है लगभग 20 लाख। इनमें से अधिकार अपने घर से करीब 12 घंटे बाहर रहते हैं। औसतन 60 से 90 मिनट ये सफर करते हैं।

देश का सबसे बड़ा लोकल ट्रेन नेटवर्क

वेस्टर्न रेलवे सबअर्बन सेक्टर चर्चगेट से दहानू तक 116 किमी।

सेंट्रल रेलवे सबअर्बन लाइन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से कसारा तक 102 किमी और सीएसएमटी से कर्जत तक 51 किमी लंबा है।

22 घंटों में 2,050 ट्रेनों का परिचालन होता है।

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प्रत्याशी कब वोट मांगे समझ के बाहर

पालघर, ठाणे, मुंबई उत्तर, मुंबई उत्तर पूर्व, मुंबई उत्तर पश्चिम सहित सात अन्य लोकसभा सीट के वोटर्स सुबह आठ बजे तक घर से निकल लेते हैं और 13 से 14 घंटे बाद जब घर वापस आते हैं तो उन्हें सिर्फ बिस्तर नजर आता है। ऐसे में प्रत्याशी कब उनसे मिले ये वो तय नहीं कर पता।

ऐसे मिल सकती है निजात

चुनाव आयोग को चाहिए कि प्रत्याशियों को रिकॉर्डेड संदेश बनाने और उसे रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सुनाए जाने की अनुमति दे। ताकि यात्री उम्मीदवारों की बात सुन कर तय कर सके कि किसे वोट देना है। इससे रेलवे को भी राजस्व की प्राप्ति होगी।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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