राममय हुई अयोध्या, बड़े संदेश को तैयार

अयोध्या के सभी महत्व के मंदिर व इमारतों को रंग बिरंगी लाइटों से ऐसा सजाया गया है कि इमारतों ने रंग ही बदल दिया है। अयोध्या राममय हो चुकी है।

योगेश मिश्र

अयोध्या। समूची अयोध्या रंगों से सरोबार है। सरयू का पावन जल केसरिया हो उठा है। अयोध्या में पग पग पर यही रंग नज़र आ रहा है। इस रंग की मस्ती अयोध्या के लोगों के चेहरे पर पढ़ी जा सकती है। उम्मीद जगती है कि भूमि पूजन के बाद यह रंग और चटख हो जायेगा। लोग आज़ादी के बाद से आज तक के मंदिर से जुड़े दिन बताते सुनें जा सकते है। लोगों के ज़ुबान पर ‘राम लला हम आयेंगे , मंदिर वहीं बनायेगें’ की पैरोडी सुनी जा सकती है। जिसमें बनायेंगे व आयेंगे ग़ायब है।

सज धज कर भूमि पूजन के लिए तैयार अयोध्या

अयोध्या के सभी महत्व के मंदिर व इमारतों को रंग बिरंगी लाइटों से ऐसा सजाया गया है कि इमारतों ने रंग ही बदल दिया है। दिवाली अयोध्या में हैं यह कह देना बहुत कम होगा। बहुत छोटा होगा। सज धज कर भूमि पूजन के लिए तैयार अयोध्या जगमग जगमग कर रही है। लोगों के चेहरे भी खिले हैं। घरों पर लगे केसरिया य, लाल व पीले झंडे अयोध्या के लोगों की ख़ुशी और इस ख़ुशी में उनके सरोबार होने की कहानी कहते हैं।अयोध्या को इन रंगों के झंडों से पाट दिया गया है।

फूलों से सजी अयोध्या की सड़कें, छत पर लगे भगवा ध्वज

खूबसूरती बयां करते सरयू के घाट, जगमग रोशनी और उसके किनारे बैठे साधु, हनुमान गढ़ी और बाकी मंदिरों को जाते रास्ते और उनपर मौजूद संत 500 क्विंटल फूलों से सजी अयोध्या शहर की सड़कें, घरों की छत पर लगे भगवा ध्वज और रास्ते भर साथ चलने वाली दीवारों पर रामायण के पात्रों के चित्र भी यहाँ की ख़ुशी ज़ाहिर कर रहे हैं।

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लोग जब रामलला के इस शहर का नाम लेते हैं, तो ‘जी’ लगाते हैं। अयोध्या उत्सव के लिए गेरुआ ओढ़े तैयार हो चुकी है। लड्‌डू बन गए हैं, जो घर-घर बांटे जाएंगे। मंदिरों में रौनक आम दिनों से कुछ ज्यादा है। मंदिरों से आती मंजीरों और रामधुन की आवाजें थमने का नाम नहीं ले रहीं।

राममय हुई अयोध्या

अयोध्या राममय हो चुकी है। यहां साकेत महाविद्यालय से हनुमानगढ़ी तक लगभग डेढ़ किमी का क्षेत्र अलग रंग में दिखाई पड़ रहा है। सड़क के दोनों किनारों के भवन पीले रंग में हैं। उन पर रामकथा के चित्र अपनी दिव्यता का एहसास करा रहे हैं।

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लोग जगह-जगह सेल्फी लेकर इस पल को अपने कैमरे में कैद कर लेना चाहते हैं। सिक्योरिटी की वजह से जहां ज्यादातर दुकानें बंद हैं, वहीं सरकारी गाड़ियों की आवाजाही ज्यादा है। हनुमान गढ़ी में एंट्री के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग भी हटा दी गई है।

पीले वस्त्रों से सजा हनुमानगढ़ी का रास्ता

हनुमानगढ़ी के रास्ते को पीले वस्त्रों से सजाया जा रहा है। हर घर और दुकान पर रात को रोशनी के लिए झालर लटकाए गये हैं। लोग प्रधानमंत्री को देखने को उत्सुक हैं। उनका कहना है कि बैरिकेडिंग की गई है। लेकिन, हम लोग घरों से निकल कर तो देखेंगे ही।

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कार्यक्रम को लेकर वाद विवाद का धुँआ भी उठ रहा है। कौन कौन आयेगा? कौन नहीं आयेगा? यह सवाल जेरे बहस है। मंदिर आंदोलन से जुड़े सभी नेताओं के न आने को भी लेकर चौराहों पर नोक झोंक देखी सुनी जा सकती है। मंदिर आंदोलन से जुड़े नेताओं के अयोध्या में अपने भी निजी रिश्ते आते जाते बन गये हैं। ये ही पक्ष व विपक्ष बन- बना रहे हैं।

तपस्थली पर 2 दिन से धार्मिक पूजा

लोगों की नाराज़गी में यह अभी हैं कि मंदिर आंदोलन से जुड़े नेता अदालत में अपना बयान क्यों बदल रहे हैं। विवादित ढाँचा गिराने को क़ुबूल क्यों नहीं कर रहे हैं। अयोध्या के चौरासी कोस में अद्भुत आध्यात्मिक उर्जा संचार करने में जुटे साधु संत व पंडित पुजारी देखे जा रहे हैं।पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्री राम के प्राकट्य से पूर्व चौरासी कोस की परिधि में अनेक देवी-देवताओं ने आकर वास किया था। जप-तप व अनुष्ठान से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ था। आज भी वहीं दिख रहा है।151 से अधिक तपस्थली पर 2 दिन से धार्मिक पूजा व जप अनुष्ठान हो रहे हैं।

 

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तीर्थ क्षेत्र अयोध्या समेत 4 जिलों में फैला

यह तीर्थ क्षेत्र अयोध्या समेत 4 जिलों में फैला हुआ है । ऋषि मुनियों की तपस्थली और अवतार स्थलों का वर्णन स्कंद पुराण ,वाल्मीकि रामायण हरिवंश पुराण और रुद्रयामल जैसे ग्रंथों में किया गया है । इसी आधार पर वर्ष 1902 में गठित एडवर्ड तीर्थ विवेचना सभा ने शिलालेख भी स्थापित किए हैं।

राम मंदिर निर्माण में 4 लाख घनफुट पत्थरों का उपयोग

मोदी पहली बार 1992 में भाजपा के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के लिए निकली तिरंगा यात्रा के संयोजक के रूप में यहाँ आये थे। कल वह मंदिर निर्माण के शुभारंभ पर पहुँच रहे है। भूमि पूजन करेंगे। 4 लाख घनफुट पत्थरों का उपयोग राम मंदिर निर्माण में होगा। 1.5 लाख घनफुट अयोध्या पहुँच चुके हैं। पत्थर राजस्थान के भरतपुर ज़िले के वंशी पहाड़पुर और सिरोही ज़िले के पिडवाडा में तराशे जा रहे हैं। एलएंड टी बनायेगी।

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