श्राद्ध में लगाएं ये वृक्ष दिलाएंगे पितृदोष से मुक्ति, साथ में करेंगे वंशवृद्धि

लगातार घट रही हरियाली को बढ़ाने के साथ आप पितृदोष से भी निजात पा सकते हैं। पितरपक्ष के समाप्त होने में अभी है  कुछ दिन शेष।पितृदोष में पीपल व गूलर के पौधों को रोपकर सकते हैं। और पितृदोष से मुक्ति पा सकते है। पितृ दोष के कारण, जिनके वंश आगे नहीं बढ़ रहा उन्हें पौधा रोपण करना चाहिए।

जयपुर: लगातार घट रही हरियाली को बढ़ाने के साथ आप पितृदोषसे भी निजात पा सकते हैं। पितरपक्ष के समाप्त होने में अभी है  कुछ दिन शेष। पितृदोष में पीपल व गूलर के पौधों को रोपकर सकते हैं। और पितृदोष से मुक्ति पा सकते है। पितृ दोष के कारण, जिनके वंश आगे नहीं बढ़ रहा उन्हें पौधा रोपण करना चाहिए।

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यह एक तरह से पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। इस बहाने लगातार घट रही हरियाली का प्रतिशत बढ़ाने में हम बनते हैं। वह भी ऐसे पेड़ों के लिए जो 24 घंटे आक्सीजन देते हैं। पं. वेदराज शास्त्री के अनुसार, गीता में श्रीकृष्ण ने पेड़ों में खुद को पीपल बताया था। इसलिए यदि आप पीपल व गूलर के पेड़ को नाली के पास या किसी दूषित स्थान पर लगा दें तो उसे नदी किनारे, किसी बगीचा या मंदिर में रोपने से पितृदोष दूर होता है। पीपल व गूलर के नए पौधों में भी रोपने से यह दोष कम होता है। इसके साथ गाय की सेवा व दान करने से भी पित्रदोष का प्रभाव कम होता है। जो लोग भागवत नहीं करा सकते, वह पितृपक्ष  के 16 दिनों में गीता के 18 अध्याय को घर में निश्चित समय पर दीपक जलाकर पढ़ें। घर में भागवत का पाठ खुद भी कर सकते हैं।

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पित्रअमावस्या के दिन पीपल व गूलर के पौधें लगाएं। यदि पीपल या गूलर के पौधे किसी अपवित्र स्थान पर लगा देखें तो उसे मंदिर, नदी किनारे या बगीचे में लगाएं। गाय की सेवा करें। गाय का दान भी कर सकते हैं। गंगास्नान  इन 16 दिनों में विशेष महत्व है। पित्रों को गंगा स्नान कराकर श्राद्ध व ब्रह्मभोज कराना चाहिए।