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हिंदी दिवस पर शाह का बयान, की थी 'एक भाषा' की वकालत, मिली तीखी प्रतिक्रियाएं

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर यह बयान दिया है। इस बयान को देशभर में तमाम प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। अधिकांश लोगों का कहना है कि भारत एक समृद्ध देश है।

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 14 Sep 2019 12:39 PM GMT

हिंदी दिवस पर शाह का बयान, की थी एक भाषा की वकालत, मिली तीखी प्रतिक्रियाएं
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हिंदी दिवस पर शाह का बयान, की थी 'एक भाषा' की वकालत, मिली तीखी प्रतिक्रियाएं
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नई दिल्ली: आज हिंदी दिवस है। इस मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बयान दिया कि 'एक देश, एक भाषा' होनी चाहिए। ऐसे में एक बार फिर हिंदी भाषा को लेकर बहस छिड़ गई है। अब हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी ही सियासी मुद्दा बन गई है। अमित शाह 'एक देश, एक भाषा' की वकालत की। वहीं, इस बयान पर विपक्षी दलों के नेता काफी भड़क गए हैं और उन्होंने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

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जानिए किसने क्या कहा:

'हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व' अटैक संग सामने आए ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया कि, 'हिंदी हर हिंदुस्तानी की मात्र भाषा नहीं है। क्या आप भारतीय धरती पर मौजूद हर भाषा का सम्मान कर सकते हैं? आर्टिकल 29 हर भारतीय को अपनी अलग भाषा और कल्चर का अधिकार देता है। भारत 'हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व' से ऊपर है।'



सभी भाषाओं का सम्मान करें: ममता बनर्जी

TMC चीफ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अमित शाह के बयान पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘हम कई भाषाएं सीख सकते हैं लेकिन हमें अपनी मातृभाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए।’



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शाह वापस लें अपना बयान: एमके स्टालिन

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन भी अमित शाह के बयान से नाराज हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘हम लगातार हिंदी को थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं। आज अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी से हमें आघात पहुंचा है, यह देश की एकता को प्रभावित करेगा। हम मांग करते हैं कि वह बयान वापस लें।’



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बता दें, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर यह बयान दिया है। इस बयान को देशभर में तमाम प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। अधिकांश लोगों का कहना है कि भारत एक समृद्ध देश है। यहां हर राज्य की अपनी एक खासियत है और हर राज्य अपनी एक भाषा बोलता है। इसलिए हिंदी जरूरी नहीं। वहीं, दिग्गज नेताओं ने भी यही कहा। नेताओं ने कहा कि कोई अपनी मातृभाषा को कभी नहीं भूल सकता।

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