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महाराष्ट्र चुनाव: क्या पहली बार चुनावी समर में उतरे भतीजे की मदद करेंगे चाचा राज ठाकरे?

राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ( एमएनएस) ने 27 उम्मीदवारोँ की पहली लिस्ट जारी की। शिवसेना नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के चाचा और एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे ने आदित्य के खिलाफ अभी तक उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 2 Oct 2019 1:21 PM GMT

महाराष्ट्र चुनाव: क्या पहली बार चुनावी समर में उतरे भतीजे की मदद करेंगे चाचा राज ठाकरे?
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मुंबई: ठाकरे परिवार से पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे 27 वर्षीय आदित्य ठाकरे को लेकर शिवसैनिक काफी उत्साहित है।

पिछले कुछ सालों से भाजपा और शिवसेना के गठबंधन में दूसरे नंबर की पार्टी को उम्मीद है कि आदित्य के चुनाव लड़ने के फैसले से उसके ‘अच्छे दिन’ आने वाले हैं।

उधर इस चुनाव के लिए राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ( एमएनएस) ने 27 उम्मीदवारोँ की पहली लिस्ट जारी की।

शिवसेना नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के चाचा और एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे ने आदित्य के खिलाफ अभी तक उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई में चाचा राज ठाकरे पहली बार विधान सभा का चुनाव लड़ने जा रहे भतीजे आदित्य ठाकरे के खिलाफ अपना प्रत्याशी नहीं खड़ा करेंगे? या यूं कहे कि वे सभी गिले शिकवे को भूलकर बैकडोर से अपना समर्थन भतीजे को देंगे?

ये सवाल उठना इसलिए भी लाजिमी है क्योंकि एम.एन.एस. की इस लिस्ट मेँ शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के सामने मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से राज ठाकरे ने अपनी पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है।

आदित्य ठाकरे अपने परिवार का पहला चेहरा हैं जो चुनाव लड रहे हैं। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र की करीब 100 से ज़्यादा की सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।

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बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से की है पढ़ाई

13 जून 1990 को जन्मे आदित्य ने 29 साल की उम्र तक सैकड़ों कविताएं लिखी हैं। वो शिवसेना दल के प्रमुख उद्धव ठाकरे और रश्मि ठाकरे के बेटे हैं। आदित्य ठाकरे ने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद सेंट जेवियर्स कॉलेज मुंबई से हिस्ट्री विषय से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने केसी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की।

गीत और कविताएं लिखने का है शौक

राजनीति और समाजसेवा की व्यस्त लाइफस्टाइल में भी आदित्य को बचपन से कविताएं लिखने का शौक रहा है। उनके दिमाग में जब भी कोई कविता आती है वो तुरंत उसे अपने मोबाइल पर लिख लेते हैं । इसके अलावा उन्होंने कई गीत भी लिखे हैं। उनकी कविताओं की किताब my thoughts in white and black साल 2007 में प्रकाशित हो चुकी है।

खेल में भी है रुचि

उनके गीतों का एलबम उम्मीद भी लांच हो चुका है । एलबम में उनके इन गीतों को कैलाश खेर, सुरेश वाडेकर, शंकर महादेवन और सुनिधि चौहान जैसे दिग्गज गायकों ने गाया है। बता दें कि आदित्य की खेलों में भी गहरी रुचि है। के चेयरमैन भी हैं।

फोटोग्राफी का है शौक

आदित्य को फोटोग्राफी का बहुत शौक है । वो कुछ अलग हटकर फोटो खींचने का शौक रखते हैं, वहीं उनके पिता को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी का शौक रहा है। कहा जाता है कि आदित्य ने भी कई अच्छे फोटो खींचे हैं।

आदित्य ठाकरे 2009 से राजनीति में

पार्टी सूत्रों के मुताबिक युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे एक अच्छे नेता हैं। वह स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अच्छी चर्चा करने की काबिलियत रखते हैं। वह जमीनी स्तर के नेताओं के साथ ही लोगों से अपने को जोड़ना जानते हैं।

सेना प्रमुख के करीबी हर्षल प्रधान के मुताबिक आदित्य साल 2009 में राजनीति में उतरे और तब से वह एक सक्रिय कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं।

राज ठाकरे 2006 में शिवसेना से हो गये थे अलग

जनवरी, 2006 में शिवसेना से अलग होने के बाद उन्होंने मार्च, 2006 में अपनी खुद की एक अलग पार्टी बनाई जिसका नाम रखा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) । इसका प्रतीक चिन्ह रेलवे इंजन है। शिवसेना में बड़ी संख्या में राज के समर्थक मनसे में शामिल हो गए।

2009 में मनसे ने 13 सीटे जीती थी

राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 2009 के विधानसभा चुनाव में 13 सीटे जीती थी। मराठी मुद्दे को हवा देकर राज ठाकरे की पार्टी सियासी तौर परखासी मजबूत हो चुकी है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव मे एम.एन.एस. सिर्फ एक विधायक ही जीत सका था।

राज ठाकरे ने पहचान के लिए अपनाई आक्रामक शैली

बाल ठाकरे के जरिए शिवसेना से झटका खाने और राज्य में अपनी नई राजनीतिक छवि बनाने के लिए राज ठाकरे को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ी और इसके लिए उन्होंने आक्रामक शैली अपनाते हुए मराठी मानुष की राजनीति पर जोर दिया।

2008 में उन्होंने उत्तर भारतीयों (खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार के खिलाफ) को महाराष्ट्र से बाहर करने के लिए हिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया।

सितंबर 2008 में मनसे कार्यकर्ताओं ने राज्य में मराठी भाषा पर जोर देने के लिए अंग्रेजी और हिंदी में लिखे गए साइन बोर्डों को काला करना शुरू कर दिया और उस पर मराठी में लिखे जाने का दबाव बनाया था। उस समय लंबे समय तक महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय बनाम मराठी को लेकर तनाव बना रहा।

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जया बच्चन के खिलाफ मोर्चा

इस बीच, वरिष्ठ फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन की एक टिप्पणी 'हम यूपी के लोग हैं, इसलिए हम हिंदी बोलेंगे, मराठी नहीं' पर राज ठाकरने ने उनसे माफी मांगने को कहा और ऐसा नहीं करने तक उनकी सभी फिल्मों पर बैन लगाने की धमकी भी दे डाली थी। इसके बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने कई सिनेमाघरों में तोड़-फोड़ भी शुरू किया। लगातार हो रहे हंगामे के कारण जया बच्चन की तरफ से अमिताभ बच्चन ने माफी मांगी।

इससे पहले 2000 में राज पर उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा फैलाने के आरोप भी लगे थे। राज ने एक रैली में कहा था कि अगर उत्तर भारतीयों के लोग 'दादागिरी' करते हैं तो उन्हें मुंबई में रहने नहीं दिया जाएगा और उनको मुंबई छोड़ना पड़ेगा।

खुद भी एक कार्टूनिस्ट

14 जून 1968 को मुंबई में जन्मे राज ठाकरे के पिता श्रीकांत केशव ठाकरे बाल ठाकरे के छोटे भाई हैं और उनकी माता कुंदा ठाकरे बाल ठाकरे की पत्नी मीना ठाकरे की छोटी बहन हैं।

जन्म के समय उनका नाम स्वराज श्रीकांत ठाकरे था। राज के पिता एक संगीतकार रहे हैं और बड़े भाई बाल ठाकरे की तरह कार्टूनिस्ट और लेखक भी हैं. उनके 2 बच्चे अमित और उर्वशी हैं।

राज ठाकरे की पत्नी निर्देशक मोहन वाघ की बेटी हैं, जिसका नाम शर्मीला ठाकरे है। वह बाल ठाकरे के भतीजे और वर्तमान में शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई भी हैं।

2014 में लगे बड़े झटके

उनकी शिक्षा मुंबई के बाल मोहन विद्या मंदिर स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने सर जेजे कॉलेज से आगे की शिक्षा प्राप्त की। वह अपने पिता और चाचा की तरह एक चित्रकार और कार्टून भी बनाते हैं।

वह बाल ठाकरे की साप्ताहिक पत्रिका 'मार्मिक' में बतौर कार्टूनिस्ट काम भी किया। वह कई मौकों पर कार्टून के जरिए केंद्र की मोदी सरकार और अन्य मामलों पर अपनी राय रखते रहे हैं। साथ ही उन्हें संगीत पर भी अच्छी खासी पकड़ है। उन्होंने बचपन में तबला, गिटार और वायलिन बजाना सीखा था।

चाचा से नाराज होकर अलग पार्टी बनाने के बाद राज की पार्टी मनसे हिंसक प्रदर्शनों के लिए जानी जाती है। अस्तित्व में आने के बाद पार्टी ने 2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरी और 288 में से 13 सीटों पर कब्जा जमाया।

जबकि 2014 के विधानसभा चुनाव में वह महज एक सीट पर सिमट गई। इससे पहले पार्टी लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोस सकी। 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में भी मनसे को कोई फायदा नहीं मिला।

अब राज्य में फिर से चुनाव का जोर है। लोकसभा के कुछ महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। अब देखना होगा कि राज अपने नेतृत्व में पार्टी को कहां तक ले जा पाते हैं।

बीजेपी प्रत्याशी पंकजा मुंडे परली से हैं मैदान में

भाजपा ने भी आज 125 सीटों पर और शिवसेना ने 124 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी की थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता पंकजा मुंडे परली से मैदान में हैं।

पहली लिस्ट जारी करते हुए भाजपा ने कहा कि वह राज्य में शिवसेना और कुछ छोटे सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।

भाजपा महासचिव अरूण सिंह की ओर से जारी सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नागपुर दक्षिण-पश्चिम से और महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल कोथरूड से चुनाव लड़ेंगे।

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