गहलोत और पायलट की लड़ाई में कूदी ये पार्टी, कांग्रेस के बाद इसने जारी किया व्हिप

राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच सुलह की कोशिशें फेल साबित हुई है। दोनों ही नेता अभी भी अपनी जिद पर अड़े है। कांग्रेस में शुरू हुए आरोप-प्रत्यारोप के बीच शीर्ष नेतृत्व को आगे आकर मामले में हस्तक्षेंप करना पड़ा है।

जयपुर: राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच सुलह की कोशिशें फेल साबित हुई है। दोनों ही नेता अभी भी अपनी जिद पर अड़े है।

कांग्रेस में शुरू हुए आरोप-प्रत्यारोप के बीच शीर्ष नेतृत्व को आगे आकर मामले में हस्तक्षेंप करना पड़ा है। इसमें गहलोत का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है।

गहलोत ने आज पार्टी के करीब 100 विधायकों की परेड कराकर ये साफ़ संकेत दिया कि उसकी सरकार बहुमत में हैं।
जबकि सचिन पायलट का आरोप है कि गहलोत सरकार अल्पमत में है। इसलिए वे उनकी बुलाई किसी भी मीटिंग में हिस्सा नहीं ले लेंगे।

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बीटीपी ने जारी किया व्हिप

इस बीच अब खबर ये आ रही है कि भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) ने राजस्थान विधानसभा में विश्वास मत साबित करने की स्थिति को लेकर अपने दो विधायकों को व्हिप जारी किया है।

पार्टी ने अपने 2 विधायक राजकुमार रोत और रामप्रसाद डिंडोर को व्हिप जारी किया है। इसमें लिखा है कि आपको अपनी पार्टी भारतीय ट्राइबल पार्टी की ओर से आदेश दिया जाता है कि राजस्थान के वर्तमान राजनीतिक संकट में आप विधान सभा के फ्लोर टेस्टिंग में कांग्रेस और बीजेपी में से किसी को वोट नहीं देंगे।

इसके अलावा आप ना ही सचिन गहलोत को वोट देंगे और ना ही सचिन पायलट को वोट देंगे। आप दोनों तटस्थ रहेंगे। अगर आप व्हिप के आदेश का उल्लंघन करते हैं तो आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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सोमवार को कांग्रेस की तरफ से दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुरजेवाला ने स्पष्ट किया कि सचिन पायलट या अन्य किसी विधायक से पार्टी को कोई परेशानी नहीं है। पार्टी उनका पक्ष सुनना चाहती है। इस तरह सुरजेवाला ने स्थिति बेहतर करने की कोशिश की।

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल सुबह ही जयपुर के लिए रवाना हो गए। उधर सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच बातचीत के लिए उनके साथ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अविनाश पांडेय और अजय माकन भी साथ रहे।

विधायकों का किया गया शक्ति प्रदर्शन

इससे पहले व्हिप जारी होने के बाद आज सुबह 10.30 बजे विधायक दल की बैठक होनी थी। मगर दो बार इसका समय परिवर्तित किया गया।

इसके बाद जब कांग्रेस को अंदाजा हो गया कि उसके पास बहुमत भर के विधायक हैं तो शक्ति प्रदर्शन किया गया।
कांग्रेस विधायक दल ने उनके समर्थन में प्रस्ताव पारित किया। साथ ही पार्टी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेतृत्व में विश्वास जताया।

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