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नागरिकता बिल पर सरकार-विपक्ष में जंग की तैयारी, जानिए इसके बारे में पूरी डीटेल्स

केंद्र की मोदी सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल लाने की तैयारी कर रही है। इस बिल में पड़ोसी देशों से शरण के लिए आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 4 Dec 2019 4:06 AM GMT

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नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल लाने की तैयारी कर रही है। इस बिल में पड़ोसी देशों से शरण के लिए आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। बुधवार को मोदी कैबिनेट की बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई है। अब इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा।

एनआरसी के बाद नागरिकता संशोधन बिल का विपक्ष जमकर विरोध कर रहा है और केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा है। बिल का विरोध कर रहे विपक्षी पार्टियों ने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया है। विपक्ष ने कहा है कि नागरिकों के बीच उनकी आस्था के आधार पर भेद नहीं किया जाना चाहिए। इस बिल का सबसे ज्यादा विरोध पूर्वोत्तर में हो रहा है, इसके तहत नागरिकता के नियमों में बदलाव किया जाना है।

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कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार धर्म के आधार पर नागरिकता को बांट रही है और शरणार्थियों को धर्म के आधार पर बांट रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार के खिलाफ खड़ी हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार इस बिल को लाकर 1985 के असम अकॉर्ड का भी उल्लंघन कर रही है। विपक्षी पार्टियों के अलावा बीजेपी के कुछ सहयोगी दल भी इसका विरोध कर रहे हैं। एनडीए में साथी असम गण परिषद (एजीपी) ने इस बिल का विरोध किया है।

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विपक्षी पार्टियों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने इस बिल पर आगे बढ़ने पर अपनी इच्छा जता दी है। मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि यह बिल सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में है। यही नहीं उन्होंने इस विधेयक की तुलना आर्टिकल 370 को हटाए जाने से भी की।

राजनाथ सिंह ने सभी सांसदों को निर्देश दिया है कि गृह मंत्री अमित शाह जब इस विधेयक को पेश करें तो सभी लोग सदन में मौजूद रहें। यह विधेयक सदन में पेश किया जा सकता है। इस बिल में पड़ोसी देशों से आने वाले गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है।

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जानिए क्या है नागरिकता बिल

नागरिक संशोधन विधेयक के तहत 1955 के सिटिजनशिप ऐक्ट में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर भारत में रहने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इस बिल के पास होने के बाद बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता आसान हो जाएगा। इन समुदायों के उन लोगों को नागरिकता दी जाएगी, जो बीते एक साल से लेकर 6 साल तक में भारत आकर बसे हैं। फिलहाल भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए यह अवधि 11 साल की है।

कौन हैं अवैध प्रवासी

नागरिकता कानून 1955 के मुताबिक अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती है। इस कानून के मुताबिक उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा के बगैर चले आए हों या फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हों लेकिन उसमें उल्लिखित अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक जाएं।

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