बिहार चुनावः पोस्टर, बैनर, भोंपू की जगह हाईटेक पिच, बदल गया सीन

देश में कोरोना काल में पहला चुनाव बिहार में होने जा रहा है। बदले माहौल में चुनावी कलेवर भी बदला हुआ है। भीड़ भड़क्का तो हो नहीं सकता सो सब कुछ डिजिटल और वर्चुअल है। अखाड़ा वर्चुअल है और सभी पार्टियां इसमें फांद चुकीं हैं।

Published by Dharmendra kumar Published: September 16, 2020 | 1:33 pm
Modified: September 16, 2020 | 2:16 pm

बिहार चुनाव में वर्चुअल चुनावी दंगल (फोटो: सोशल मीडिया)

नीलमणि लाल

पटना: देश में कोरोना काल में पहला चुनाव बिहार में होने जा रहा है। बदले माहौल में चुनावी कलेवर भी बदला हुआ है। भीड़ भड़क्का तो हो नहीं सकता सो सब कुछ डिजिटल और वर्चुअल है। अखाड़ा वर्चुअल है और सभी पार्टियां इसमें फांद चुकीं हैं। चुनाव प्रचार के परंपरागत तरीके अब शायद ही आजमाए जाएंगे। न तो दीवारें पोस्टर से पटी होंगी और न ही हेलीकॉप्टर के शोर सुनाई देंगे, न रैली-जनसभाएं होंगी और न ही रोड शो।

कोरोना की वजह से बदली परिस्थिति में तमाम बंदिशों के कारण प्रत्याशियों को शक्ति प्रदर्शन का मौका भी नहीं मिल सकेगा। कुल मिला कर मामला डिजिटल और वर्चुअल होने वाला है और अगर ये सफल हो गया तो पक्की बात है कि ये डिजिटल चुनाव रवायत की शक्ल अख्तियार कर लेगा। डिजिटल चुनाव एक नए चुनावी युग का रास्ता साफ़ करेगा।

सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका

सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और वाट्सऐप इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएंगे। भाजपा ने तो सात जुलाई को ही अमित शाह की वर्चुअल रैली कर शुरुआत कर दी थी। कोरोना काल में चुनाव का विरोध कर रही कांग्रेस व राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियों ने भी अब अपने को तैयार कर लिया है। सभी बड़ी पार्टियां अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ गईं हैं लेकिन क्षेत्रीय व छोटे दल परेशान जरूर हैं। सभी बड़े दलों के वॉर रूम भी लगभग तैयार हैं, आइटी प्रोफेशनल्स की टीम पार्टियों के साथ काम कर रहीं हैं। जोर-आजमाइश करने उतरीं बड़ी और प्रमुख पार्टियों ने बेहतर तकनीक का सहारा लिया है।

BJP

भाजपा की कमान दस हजार डिजिटल वर्करों के हाथों में सौंप दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 25 हजार एवं शहरी क्षेत्रों में एक लाख लोगों को सोशल मीडिया से जोड़ने का लक्ष्य पार्टी ने रखा है। इसके साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम पर भी ग्रुप बनाना तय किया गया है। ऐसी तैयारी की गई है कि एक बटन क्लिक करने पर पार्टी दो करोड़ लोगों से सीधे कनेक्ट हो सकती है। इसके अलावा 150 डिजिटल रथ तैयार किए गए हैं ताकि ई-रैली का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। इन रथों पर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई है जिसके जरिए लोग वर्चुअल रैलियों का लाइव प्रसारण देख सकेंगे। इसके अलावा ‘कमल कनेक्ट’ ऐप के जरिए भी लोगों को जोड़ने का काम चल रहा है।

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जदयू और राजद हुए डिजिटल

नीतीश कुमार की जनता दल यू ने भी अपनी वेबसाइट ‘जेडीयू लाइव डॉट कॉम’ लॉन्च कर दी है। पार्टी ने पहले से ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में वाट्सऐप ग्रुप बना रखे हैं। काफी दिनों से जदयू फेसबुक पर ‘संडे संवाद’ भी कर रही है जबकि हर रविवार को वाट्सऐप पर ‘बिहार के नाम, नीतीश के काम’ नाम का न्यूज लेटर फ्लैश किया जाता है। जदयू के पास आईटी के दक्ष लोग पहले से ही मौजूद हैं।

JDU

परंपरागत वोटिंग की वकालत करने वाले लालू के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी पटना स्थित कार्यालय में एक बार में दस लाख लोगों से जुड़ने की व्यवस्था कर रखी है। राजद का वॉर रूम काम भी कर रहा है। लालू पुत्र तेजस्वी यादव फेसबुक लाइव पर भी कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं। एक वॉर रूम बनाकर सोशल मीडिया कैंपेन व डिजिटल सदस्यता अभियान का काम हो रहा है। जिले से प्रखंड स्तर पर राजद से जुड़े कार्यकर्ताओं को डिजिटल तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

RJD

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कम्यूनिस्ट भी ऑनलाइन

सर्वहारा समाज की बात करने वाले कम्यूनिस्ट भी डिजिटल हो गए हैं। भाकपा (माले) पचास हजार वाट्सऐप ग्रुप तैयार कर चुकी है। हरेक ग्रुप में करीब सौ-सौ लोग हैं। फेसबुक पर भी पार्टी सक्रिय है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा का वॉर रूम भी बनकर तैयार है जिसे दिल्ली व पटना के आइटी प्रोफेशनल्स संभाल रहे हैं, जबकि विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) की सोशल मीडिया हैंडल करने के लिए पचास से ज्यादा प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं।

CPI(M)

सात सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘निश्चय संवाद’ नामक वर्चुअल रैली हुई तो उसी दिन कांग्रेस ने भी अपनी रैली की। इसके बाद फिर दस सितंबर को वर्चुअल रैली कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी माहौल गर्मा दिया। भाजपा मुख्य रूप से युवा, किसान तथा महिलाओं पर फोकस कर रही है। कांग्रेस ने भी सात सितंबर को ही चंपारण से चुनाव प्रचार का आगाज कर दिया।

Congress

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चुनाव परिणाम अपने पक्ष में करने के लिए पार्टियों का काम जारी है लेकिन उन्हें इस बात का एहसास है कि यह कवायद तो उनलोगों तक ही उनकी बात पहुंचा पाएगी जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। बड़ी संख्या में वोटर स्मार्ट फोन से महरूम हैं तो ऐसे में उनके पास पहुंचना तो डोर-टू-डोर कैंपेन से ही संभव हो सकेगा। ऐसे में वर्चुअल और फिजिकल का फ्यूज़न कैसे बनेगा ये देखना दिलचस्प होगा।

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