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खर्च करने की बेहतर स्थिति में है सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘लोकल’ पर ज़ोर दिया है और स्थानीय आत्म निर्भरता के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया है जो भारत के जीडीपी के 10 फीसदी के बराबर है। दुनिया के अन्य देशों द्वारा दिये गए प्रोत्साहन पैकेजों में भारत का पैकेज अग्रणी है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 12 May 2020 7:52 PM GMT

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नीलमणि लाल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘लोकल’ पर ज़ोर दिया है और स्थानीय आत्म निर्भरता के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया है जो भारत के जीडीपी के 10 फीसदी के बराबर है। दुनिया के अन्य देशों द्वारा दिये गए प्रोत्साहन पैकेजों में भारत का पैकेज अग्रणी है। अमेरिका का पैकेज उसकी जीडीपी के 13 फीसदी के बराबर है जबकि जापान ने अपनी जीडीपी के 21 फीसदी के बराबर का पैकेज दिया है।

सरकार वैसे अभी वित्तीय रूप से कम्फ़र्टेबल स्थिति में है। वित्त वर्ष 2021 के लिए बाजार से उधारी की योजना 7.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है और इसकी वजह से सरकार को खर्च करने का ज्यादा अवसर मिल गया है। केंद्र सरकार को अब स्थिति कुछ ज्यादा साफ हो गई है कि कितना गहरा आर्थिक झटका है और आगे क्या होगा। और अब अर्थव्यवस्था धीरे धीरे खोली जा रही है, उद्योगों खासकर छोटे उद्यमों को मदद की जरूरत है, जो उन्हें मिल सकेगी।

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वित्त मंत्री अब जो घोषणाएं करेंगी

नई घोषणाओं में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की कार्यशील पूंजी के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम शामिल होने की उम्मीद है। विस्थापित श्रमिकों के हजारों की संख्या में शहर छोड़कर जाने की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार अपना कार्यबल बरकरार रखने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन देगी। आम लोगों के लिए योजना का विस्तार प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के जरिये होगा। मनरेगा के भुगतान और पीएम किसान योजना में एक और बढ़ोतरी संभव है। इसके पहले वित्त मंत्री की ओर से नकदी अंतरण को लेकर मार्च के आखिर में की गई घोषणा को भी विस्तार दिया जा सकता है।

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केंद्र व राज्य सरकारें धीरे धीरे लॉकडाउन खत्म कर रही हैं और खासकर ग्रीन और ऑरेंज जोन में आर्थिक गतिविधियों को अनुमति दे रही हैं। ऐसे में ध्यान उन क्षेत्रों पर होगा, जो इस महामारी और लॉकडाउन बढऩे से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनमें सेवा, उड्डयन, पर्यटन, आतिथ्य सत्कार, ऑटो व अन्य क्षेत्र शामिल हैं। वित्त मंत्री के बाद आगे के कदम के लिए अन्य संबंधित मंत्रालय सामने आ सकते हैं।

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वित्त मंत्रालय के 26 मार्च के पैकेज के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक ने भी कई घोषणाएं की हैं, जिनमें म्युचुअल फंड व एनबीएफसी से जुड़े फैसले शामिल हैं। ब्याज दरें कम की गई हैं, रिफाइनैंस विंडो खोला गया है और अन्य कई कदम उठाए गए हैं, जिससे नकदी का प्रवाह चालू हो सके। वित्त मंत्री का पहला पैकेज जीडीपी का करीब 0.8 प्रतिशत था। यह जी-20 देशों की तुलना में बहुत कम था। संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रोत्साहन पैकेज उसके जीडीपी के 11 प्रतिशत के बराबर पहुंच गया है। स्टैटिस्टिका के आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया ने अपने जीडीपी के 9.7 प्रतिशत, ब्राजील ने 3.5 प्रतिशत के बराबर प्रोत्साहन पैकेज दिया है।

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