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बीसवीं शताब्दी के लेखक कमलेश्वर, जिन्होंने लिखीं 100 फिल्में, ऐसा रहा जीवन

कमलेश्वर ने अपने जीवन में 99 हिंदी फिल्मों का लेखन कार्य किया है। आपको बता दें कि इन्होंने अमानुष,सारा आकाश , द बर्निग ट्रेन, राम बलराम ,सौतन ,आंधी, पति पत्नी और वो , नटवरलाल जैसी कई फिल्मों का लेखन किया है।

Shraddha Khare

Shraddha KhareBy Shraddha Khare

Published on 6 Jan 2021 5:58 AM GMT

बीसवीं शताब्दी के लेखक कमलेश्वर, जिन्होंने लिखीं 100 फिल्में, ऐसा रहा जीवन
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नई दिल्ली : कमलेश्वर बीसवीं शताब्दी के सबसे सशक्त लेखकों में से एक हैं। इन्होंने कहानी, उपन्यास, फिल्म पटकथा,स्तम्भ लेखन जैसी अनेक विधाओं में उन्होंने अपनी लेखन का परिचय दिया है। आपको बता दें कि इनका जन्म 6 जनवरी 1932 को मैनपुरी, उत्तरप्रदेश में हुआ था। बाल्यावस्था में ही इनके पिता की मृत्यु हो गई थी। तब इनकी मां ने ही इनका लालन पालन किया था। मां के संस्कारों ने कमलेश्वर के व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। मैनपुरी में हाई स्कूल की परीक्षा पास करने के बाद इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय में हिंदी विषय से एमए किया। इसके बाद इनका साहित्यिक सफर शुरू हुआ।

जीवन परिचय

आपको बता दें कि इनका पूरा नाम कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना है। कमलेश्वर बहुआयामी रचनाकार थे। इन्होने अपने जीवन में कई कहानियां, कई लेख अपने जीवन में लिखे हैं। आज इनके जन्मदिन पर आपको इनके जीवन के किये कई साहित्य लेखों से परिचय करवा रहे हैं। इन्होंने 11 कहानी संग्रह, 10 उपन्यास, 20 अन्य पुस्तकें लिखी। इसके साथ उन्होंने आलोचना, यात्रा विवरण, आत्मकथा एवं संस्मरण भी लिखे।

कालेश्वर ने लिखी कहानियां

इन्होंने अपने जीवन में सारिका,गंगा, कथा यात्रा, इंगित, श्री वर्षा पत्रिका तथा इसके साथ दैनिक जागरण समाचार पत्र आदि का संपादन किया। आपको बता दें कि इन्होंने अपने जीवन में 1959 में भारतीय दूरदर्शन के लिए प्रथम स्क्रिप्ट लिखी थी। इन्होने 1980 -1982 में दूरदर्शन के एडिशनल जनरल रहे।

फिल्मों का सफर

कमलेश्वर ने अपने जीवन में 99 हिंदी फिल्मों का लेखन कार्य किया है। आपको बता दें कि इन्होंने अमानुष,सारा आकाश , द बर्निग ट्रेन, राम बलराम ,सौतन ,आंधी, पति पत्नी और वो , नटवरलाल जैसी कई फिल्मों का लेखन किया है। इसके साथ इन्होंने टीवी सीरियल चंद्रकांता, बेताल पच्चीसी, युग, बिखरे पन्ने ,विराट , दर्पण जैसे कई धारावाहिक के लेखक रहे हैं। इसके साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं विषयों पर तथा पंडित नेहरू , इंदिरा गांधी ,मदर टेरेसा की अंतिम यात्रा पर टर्निंग कमेंट्री भी की है।

इनके जीवन की रचनाएं

कमलेश्वर की प्रमुख रचनाओं में राजा निरंबसिया, देव की मां, कस्बे का आदमी, भटके हुए लोग , एक अश्लील कहानी , नीली झील, मांस का दरिया , डाक बंगला , तीसरा आदमी, राते, लाश , कितने पकिस्तान जैसी कई प्रमुख रचनाएं हैं। जिन्होंने इनके जीवन को काफी उभारा है।

लेखन कला पर नए प्रतिमान दिए

कमलेश्वर के लेखन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्होंने अपने जीवनानुभवों को अपने लेखन में उतारा है। इन्होंने अपने जीवन में जो कुछ झेला है उसे अपने लेखन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है। इन्होंने अपने जीवन के अंतर्विरोधों के सूत्रों को बड़ी बारीकी से पकड़ा है। आपको बता दें कि कमलेश्वर नयी पीढ़ी के उन सशक्त कलाकारों में अपना अग्रिम स्थान रखते हैं। इन्होंने अपने लेखन कला को शिल्प और भाषायी स्तर पर नए प्रतिमान दिए हैं। ये अपनी शर्तो पर ही लिखते थे। लेखन से जुड़े रहना इनका स्वाभाव था।

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सम्मान और पुरस्कार

कमलेश्वर को अपने जीवन में लिखी हुई रचना के फलस्वरूप कई सम्मान और पुरस्कार मिले हैं। आपको बता दें कि इन्हें 2005 में ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया था। इसके साथ उनकी पुस्तक कितने पाकिस्तानी पर साहित्य अकादमी ने उन्हें पुरस्कृत किया था। कमलेश्वर ने अपने 75 साल के जीवन में 12 उपन्यास, 17 कहानी संग्रह और करीब 100 फिल्मों की पटकथाएं लिखी। 27 जनवरी 2007 को इनका निधन हो गया था। लेकिन लोग आज भी इस साहित्यकार को याद करते हैं।

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