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दलित राजनीति के अग्रणी रहे रामविलास पासवान

पासवान ने अपना राजनीतिक जीवन संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में शुरू किया और 1969 में पहली बार पासवान बिहार के राज्यसभा चुनावों में संयुक्‍त सोशलिस्‍ट पार्टी के उम्‍मीदवार के रूप निर्वाचित हुए।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 9 Oct 2020 6:04 AM GMT

दलित राजनीति के अग्रणी रहे रामविलास पासवान
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दलित राजनीति के अग्रणी रहे रामविलास पासवान (social media)
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नीलमणि लाल

लखनऊ: लम्बी बीमारी के बाद लोक जनशक्‍ति पार्टी के अध्‍यक्ष राम विलास पासवान का दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे। राम विलास पासवान बिहार में दलित राजनीति के अग्रणी नेता रहे थे। उन्हें आठ बार लोकसभा सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद के रूप में चुना गया।

राजनीतिक सफ़र

पासवान ने अपना राजनीतिक जीवन संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में शुरू किया और 1969 में पहली बार पासवान बिहार के राज्यसभा चुनावों में संयुक्‍त सोशलिस्‍ट पार्टी के उम्‍मीदवार के रूप निर्वाचित हुए।

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1977 में छठी लोकसभा में पासवान जनता पार्टी के उम्‍मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए।

1982 में हुए लोकसभा चुनाव पासवान दूसरी बार विजयी रहे।

1983 में उन्‍होंने दलितों के उत्‍थान के लिए दलित सेना का गठन किया।

1989 में नवीं लोकसभा में तीसरी बार लोकसभा में चुने गए।

1996 में दसवीं लोकसभा में वे निर्वाचित हुए।

2000 में पासवान ने जनता दल यूनाइटेड से अलग होकर लोक जनशक्‍ति पार्टी का गठन किया।

राम विलास पासवान बारहवीं, तेरहवीं और चौदहवीं लोकसभा में भी वे विजयी रहे। अगस्‍त 2010 में बिहार राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए और कार्मिक तथा पेंशन मामले और ग्रामीण विकास समिति के सदस्‍य बनाए गए।

ram-vilas-paswan ram-vilas-paswan (social media)

जीवन सफ़र

राम विलास पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले में एक दलित परिवार में हुआ था। पासवान ने कोसी कॉलेज, पिल्खी और पटना विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक और मास्टर ऑफ़ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1960 के दशक में राजकुमारी देवी से शादी की थी। 2014 में उन्होंने खुलासा किया कि उनके 1981 में लोकसभा के नामांकन पत्र को चुनौती दिए जाने के बाद उन्होंने राजकुमारी देवी को तलाक दे दिया था। उनकी पहली पत्नी से दो बेटियां, ऊषा और आशा हैं। 1983 में, उन्होंने रीना शर्मा से शादी की जो एक एयरहोस्टेस और अमृतसर से पंजाबी हिंदू परिवार से हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी है। उनके बेटे चिराग पासवान नेता से पहले एक अभिनेता रह चुके हैं।

इमरजेंसी का विरोध

वे व्यक्तिगत रूप से राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी रहे। वे मोरारजी देसाई से अलग हो गए और जनता पार्टी-एस में लोकबंधु राज नारायण के नेतृत्व में पार्टी के अध्यक्ष और बाद में इसके चेयरमैन के रूप में जुड़े रहे। 1975 में जब आपातकाल की घोषणा की गई , तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्होंने पूरा समय जेल में बिताया। 1977 में रिहा होने पर, वे जनता पार्टी के सदस्य बन गए और पहली बार इसकी टिकट पर संसद के लिए चुनाव जीत हासिल की, और उन्होंने सबसे अधिक अंतर से चुनाव जीतने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया।

1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिए एक संगठन दलित सेना की स्थापना की

1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिए एक संगठन दलित सेना की स्थापना की। पासवान 1989 में 9 वीं लोकसभा के लिए फिर से चुने गए और उन्हें विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केंद्रीय श्रम और कल्याण मंत्री नियुक्त किया गया। 1996 में उन्होंने लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन का भी नेतृत्व किया क्योंकि प्रधानमंत्री राज्य सभा के सदस्य थे। यह वह वर्ष भी था जब वे पहली बार केंद्रीय रेल मंत्री बने।

उन्होंने 1998 तक उस पदभार को संभाला

उन्होंने 1998 तक उस पदभार को संभाला। इसके बाद, वे अक्टूबर 1999 से सितंबर 2001 तक केंद्रीय संचार मंत्री रहे, जब उन्हें कोयला मंत्रालय में स्थानांतरित किया गयाए और वे इस पद पर अप्रैल 2002 तक बने रहे। 2000 में, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) बनाने के लिए पासवान जनता दल से अलग हो गए। 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद, पासवान संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में शामिल हो गए और उन्हें रसायन और उर्वरक मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बनाया गया। पासवान ने पांच अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के तहत एक केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।

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2009 में पहली बार हारे

2009 के आम चुनाव में पासवान ने लालू प्रसाद यादव और उनके राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन किया। यह जोड़ी बाद में मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई और उन्हें चौथा मोर्चा घोषित किया गया। 33 वर्षों में पहली बार वे हाजीपुर से जनता दल के राम सुंदर दास से चुनाव हार गए जो कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री थे। उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी 15 वीं लोकसभा में कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी।

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