तब्लीगी जमात नहीं ये है मौत का ट्रक, इतनी स्पीड से आ रहा आपके करीब

तब्लीगी जमात ने भारतीयों की तरफ धीमी गति से बढ़ रहे इस ट्रक की ड्राइविंग सीट पर कब्जा करके पूरा दृश्य बदल दिया। उसने कोरोना ट्रक को ईंधन पानी देकर इसकी रफ्तार को 70 किमी प्रति घंटा कर दिया है। आने वाले दिनों में इसकी स्पीड 80, 90 या 100 किलोमीटर प्रति घंटा या फिर उसके पार पहुंचती है, ये आने वाला वक़्त बताएगा।

लखनऊ। कोरोना वॉरियर्स की जंग पर दुश्मन वार किया है तब्लीगी जमात ने। इससे पहले शाहीन बाग की महिलाएं भी कोरोना को अल्लाह की देन बता कर खुद के सेफ होने का दावा कर रही थीं। अब मौलाना साद ने कोरोना बम तैयार करने में अहम भूमिका अदा की है। ऐसे बम जो कोरोना संक्रमण से ठीक होना न चाहकर डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को परेशान करने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। यहां तक कि संक्रमण फैलाने के लिए उनके थूकने की भी खबरें आ रही हैं।

जिस समय हमारा देश कोरोना संक्रमण के खिलाफ जंग में फतह के करीब था, हमने कोरोना रूपी जानलेवा वायरस की रफ्तार को थाम लिया था, एक ऐसे समय में तब्लीगी जमात ने कोरोना रूपी मौत के ट्रक को एक ऐसी रफ्तार दे दी है जिसे हम कितने दिन में और कब तक रोक पाएंगे कह पाना मुश्किल है।

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गुरुवार को अब तक कोविड19 के 2071 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 66 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से 400 मामले तबलीग़ी जमात के आयोजन में या तो गए थे या वहां जाने वालों के संपर्क में आए थे। जबकि नौ हजार लोगों को क्वारंटाइन किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय भी मान रहा है कि कोरोना मामले की इस बाढ़ का बड़ा कारण तब्लीगी जमात है। ये हाल तो तब है कि जब अभी तक सभी राज्यों से इसके आयोजन में गए लोगों और उनके संपर्क में आने वालों की शिनाख्त नहीं हो पाई है।

ब्रुकिंग्स इंडिया की रिसर्च है अहम

भारत के कोरोना ग्राफ़ नजर रख रही ब्रुकिंग्स इंडिया की रिसर्च डायरेक्टर शमिका रवि ने बीबीसी को बताया कि तब्लीगी जमात के मामले ने कोरोना की लड़ाई में देश को कई दिन पीछे धकेल दिया है।

ब्रुकिंग्स इंडिया के मुताबिक़  23 मार्च से पहले भारत में कोराना के केस तीन दिन में दोगुने हो रहे थे।  23 मार्च से 29 मार्च तक 5 दिन में दोगुने हो रहे थे और 29 मार्च के बाद से कोरोना के मामले 4 दिन में दोगुना हो रहे है। शमिका इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की इकोनॉमिक एडवाइज़री काउंसिल यानी आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य भी रह चुकी हैं।

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साधारण ढंग से समझाते हुए शमिका कहतीं हैं, “अगर आप कोरोना को हाइवे पर चलता ट्रक मान लें, तो ये ट्रक आपकी ओर पहले 100 किलोमीटर प्रति घंटा स्पीड पर आ रहा था, 23 मार्च से 29 मार्च तक उसकी स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई थी.” यानी कोरोना ट्रक रुका नहीं था। बस भारत सरकार के प्रयासों से उसकी गति धीमी पड़नी शुरू हो गई।

लेकिन तब्लीगी जमात ने भारतीयों की तरफ धीमी गति से बढ़ रहे इस ट्रक की ड्राइविंग सीट पर कब्जा करके पूरा दृश्य बदल दिया। उसने कोरोना ट्रक को ईंधन पानी देकर इसकी रफ्तार को 70 किमी प्रति घंटा कर दिया है। आने वाले दिनों में इसकी स्पीड 80, 90 या 100 किलोमीटर प्रति घंटा या फिर उसके पार पहुंचती है, ये आने वाला वक़्त बताएगा।